रतनमणी डोभाल
हरिद्वार।
शराब से राजस्व प्राप्त करने की सरकारों की नीति सवालों के घेरे में है। ब्रिटिशकाल में धर्मनगरी को मद्यनिषेध घोषित किया गया था। राजस्व जुटाने के लिए मद्यनिषेध क्षेत्र में नियमों के खिलाफ शराब की दुकानें खोली जा रही हैं।
जन विरोध के बीच भी सरकार की प्राथमकिता में अधिकाधिक शराब बेचना है। ऐसा करने के लिए नियमों को भी ताक पर रखा जा रहा है। ब्रिटिशकाल में धर्मनगरी को मद्यनिषेध क्षेत्र घोषित किया गया था। म्युनिस्पिल बायलॉज में प्रावधान है कि तत्कालीन नगरपालिका (अब नगर निगम) सीमा से छह किलोमीटर के अंदर देशी-विदेशी शराब की दुकान नहीं खोली जा सकती है। इसी बायलॉज के आधार पर 90 के दशक में कांगड़ी में शराब का ठेका खोलने का विरोध किया था। इसके बाद शराब लॉबी ने तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार पर पालिका बायलॉज की सीमा को कम करने का दबाव बनाया था। शराब लॉबी के सामने घुटने टेकते हुए तत्कालीन सरकार ने 1995-96 में नया शासनादेश जारी कर नगरपालिका सीमा को 6 किमी से घटाकर 3 किमी कर दिया था। अब उत्तराखंड की सरकार इसको भी नहीं मान रही है और नगर निगम सीमा के 3 किमी के अंदर तक शराब की दुकानें खोल रही है। लोगों के विरोध के बीच श्यामपुर में मोबाइल गाड़ी से शराब बेची जा रही है। नगर निगम सीमा के अंदर सलेजफार्म की भूमि पर ठेका खोलने की तैयारी है जिसके लिए नगर निगम भी एनओसी देने का तैयार है। एक ठेका रानीपुर झाल के नया गांव क्षेत्र में खुला है जो नगर निगम सीमा क्षेत्र के 3 किलोमीटर के अंदर है।
धर्मनगरी के अंदर अवैध शराब का जोर
नगर निगम सीमा के नजदीक शराब का ठेका खोलने की वजह यह भी है कि ठेका पास मेें होने से ठेकेदारों को गली-गली व बस्ती-बस्ती छोड़े गए अपने वेंडरों तक माल पहुंचाने में सुविधा होती है। अवैध शराब का गोरखधंधा अब इतना व्यापक हो गया है कि यह कहने वाले लोगों की कमी नहीं है कि इससे तो अच्छा है सरकार वैध रूप से ठेका ही खोल दे, ताकि लोगों को अधिक पैसे तो नहीं चुकाने पड़ेंगे।
यूूपी विधानसभा में गूंजा था मामला
शराब ठेकेदारों ने जब महात्मा गांधी एवं स्वामी श्रद्धानंद की पुण्य भूमि कांगड़ी में शराब की दुकान खोलने का प्रयास किया था, तब लोगों ने जबरदस्त विरोध किया था। लेकिन सरकार ने शराब लॉबी के सामने घुटने टेक दिए थे। तब विधायक अंबरीष कुमार ने उत्तर प्रदेश विधानसभा के उत्तर प्रदेश विधानसभा में तत्कालीन भाजपा सरकार को घेरते हुए नगरपालिका बायलॉज के विपरीत शराब का ठेका खोलने का मुद्दा उठया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब उत्तराखंड की भाजपा सरकार तीन किलोमीटर की सीमा का भी पालन नहीं कर रही है और शहर के नजदीक तक शराब बेचने पर आमादा है।