गुमानीवाला की सीमा कोठियाल का वित्त अधिकारी (पीसीएस) में चयन
पिता और भाई की मौत के बाद अकेले किया संघर्ष, हरिद्वार में ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक हैं सीमा
अमर उजाला ब्यूरो
श्यामपुर (ऋषिकेश)।
परिस्थितियां विपरीत होने पर भी हार न मानने की सीमा बंगवाल ने मिशाल पेश की है। पिता व भाई की मौत होने के बाद सीमा ने विषम परिस्थितियाें में पीसीएस में जो सफलता हासिल की है, वह काबिल-ए तारीफ है। सीमा ने पीसीएस (वित्त अधिकारी) में प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया है।
हरिद्वार में ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक के पद पर तैनात गुमानीवाला की सीमा दीपक कोठियाल उर्फ सीमा बंगवाल के सिर से पिता का साया काफी समय पहले उठ चुका था। इसके बाद जवान भाई की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जब उनकी शादी हुई तो ससुराल पक्ष का रवैया ठीक न होने के कारण उन्होंने अकेले ही संघर्ष की राह चुनी।
सीमा ने बताया कि पिता पशु लोक विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। इसी बीच उनकी किडनी खराब हो गई। आर्थिक तंगी के चलते उनका इलाज भी न हो सका। बीमारी के कारण कुछ समय बाद पिता की मौत हो गई। पिता की मौत के सदमे से परिवार उबर भी नहीं पाया था कि कुछ ही महीने बाद जवान भाई की भी दुर्घटना में मौत हो गई। गरीबी के बावजूद सीमा ने जैसे-तैसे बीएससी करने के बाद पंतनगर विश्वविद्यालय से मत्स्य पालन में चार साल की डिग्री की। इसके बाद वर्ष 2006 में उसकी नौकरी मत्स्य विभाग में निरीक्षक के पद पर लग गई।
इसके बाद सीमा ने पीसीएस परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। वह रोज गुमानीवाला (तुलसी विहार) से सुबह नेपाली फार्म पहुंचती और यहां से पीसीएस की कोचिंग के लिए दून जाती। बताया कि उन्होंने एक भी दिन कोचिंग मिस नहीं की। उन्होंने बताया कोचिंग देने वाले आरए खान ने उनका उत्साहवर्धन किया। सफलता में मां सुशीला बंगवाल का बहुत योगदान है।
उन्होंने बताया कि उनकी पहली वरीयता एसडीएम बनने की थी और दूसरी इच्छा वित्त अधिकारी की। सीमा अपने करीब सात साल के बेटे को लेकर मां के साथ रहती हैं।