अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
ट्रांसपोर्ट नगर नहीं होने से सिडकुल की हालत बदहाल होती जा रही है। चारों तरफ सडक़ों के किनारे में ट्रक खड़े दिखाई दे रहे है। बीते सालों में हुए हादसों के बाद भी विभाग सबक नहीं ले रहा है। करीब 12 साल बाद भी ट्रांसपोट नगर नहीं बन सका है। जबकि सिडकुल में नामी कंपनियां अपनी ब्रांच खोलकर कारोबार कर रही है।
हरिद्वार में एक भी ट्रांसपोर्ट नगर नहीं होने से ट्रांसपोर्टरों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पिछले कई दशकों से ट्रक ऑपरेटर ट्रांसपोर्ट नगर की मांग सरकार से करते आ रहे हैं लेकिन सफलता नहीं मिली। वर्ष 2005 में सिडकुल पुरी तरह स्थापित हो गया था। विशेष राज्य का दर्जा मिलने के बाद हरिद्वार सिडकुल में उद्यमियों की लाइन लग गई थी। शुरूआत में फैक्ट्रियों की संख्या काफी कम थी। लेकिन वर्तमान में फैक्ट्रिया 700 से ऊपर पहुंच गई है। नामी फैक्ट्रियां सिडकुल में काम कर रही हैं। प्रतिदिन 2000 से अधिक ट्रक सिडकुल फैक्ट्रियों से माल इधर से उधर पहुंचाने के लिए पहुंचते हैं। ट्रांसपोट नगर न होने से ट्रक बीच रास्ते में ही खड़े रहते हैं। रास्तों में ट्रक खड़े होने से हादसे भी बढ़ रहे हैं। साथ ही ट्रक चालकों से लूट आदि की घटनाएं भी बढ़ गई है। बीच में ट्रक खराब होने में क्रेन की मदद से खींचकर काफी मशक्कत के बाद ट्रक को ठीक कराया जाता है। इतना सब होने के बावजूद अधिकारी ट्रांसपोर्ट नगर को लेकर संजीदा नहीं दिख रहे हैं। ये हालत तब है जब सिडकुल में हीरो, महिंद्रा, विप्रो, हैवल्स, किरबी सहित कई नामी फैक्ट्री काम कर रही है। जिलाधिकारी दीपक रावत का कहना है कि इस बारे में शासन स्तर पर प्रस्ताव भेजकर अगली व्यवस्था की जाएगी।