कर्णप्रयाग। बारिश के कारण किसानों के लिए पानी तो उपलब्ध है, लेकिन पैदावार बढ़ाने के लिए जिले के किसान इस बार फसलों में पड़ने वाली खाद (यूरिया) के मोहताज हैं। किसानों का कहना है कि खाद उपलब्ध कराने वाली समितियों के पास खाद का भंडारण ही नहीं है।
चमोली जिले की 54 साधन सहकारी समितियों के लिए राज्य सहकारी संघ रसायनिक खाद (यूरिया) उपलब्ध कराता है। किसान असिंचित खेती में बारिश के समय और सिंचित खेती में जरूरत पड़ने पर साल भर फसलों में छिड़काव करते हैं, लेकिन इस बार समितियों के पास बहुत कम मात्रा में खाद की आपूर्ति हो पाई, जिसके चलते जिले के गौचर, थराली और नारायणबगड़ में किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। थराली के किसान आरसी जोशी, खड़गराम, मोहन राम और दिनेश चंद्र आदि का कहना है कि यहां चिड़िंगा मल्ला, जौला, बुड़जौला, कुलसारी सहित कर्णप्रयाग के उत्तरों, लंगासू, गौचर, मंगरोली सहित आस पास के गांवों के किसानों को समितियों से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। साधन सहकारी समिति सचिव संघ के जिलाध्यक्ष आरएस मिंगवाल ने बताया कि खाद की डिमांड भेजी गई है।
इंसेट
हरिद्वार से ही लटकी आपूर्ति
कर्णप्रयाग। चमोली जिले को खाद की आपूर्ति करने वाले राज्य सहकारी संघ के जिला प्रभारी वीपी पुरोहित का कहना है कि चमोली में पूरे साल करीब 130 मीट्रिक टन खाद की डिमांड आती है। इस बार अभी 64 क्विंटल आपूर्ति की जा चुकी है। जहां खाद नहीं है उन्होंने समय पर डिमांड नहीं भेजी। चूंकि जिले में हरिद्वार से खाद की आपूर्ति की जाती है इसलिए वहीं से खाद की आपूर्ति में समस्या हो रही है।