शहीद के बलिदान को भूली सरकार
-- स्मारक बनाने के लिए दी जमीन पर हो चुका है कब्जा
अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला। कारगिल युद्ध में शहीद हुए कैलाश कुमार के गांव डांडी की डेढ़ दशक बाद भी सड़क नही बन पाई है। तमाम प्रयासों के बाद गांव में शहीद का स्मारक तक नहीं बन पाया। वहीं शहीद के परिजनों की सुध लेने के लिए सरकार की तरफ से कोई नुमाइंदा अब तक उनके घर नहीं पहुंचा। बड़कोट ग्राम पंचायत के डांडी गांव के रहने वाले राम किशोर के दूसरे पुत्र कैलाश कुमार कारगिल के युद्ध में शहीद हो गए थे। सेना में महज चार साल आठ माह और नौ दिन की सेवा करते हुए वह कारगिल युद्ध में शहीद हुए।
कारगिल युद्ध के 18 साल बाद शहीदों के परिजनों सामने वह मंजर आज भी ताजा है जब तिरंगे में लिपटा शहीद कैलाश का शव गांव पहुंचा। तब शासन, प्रशासन से लेकर सत्ता के बडे़ नेता गांव पहुंचे थे, और हरसंभव मदद करने का भरोसा दिया था। सालों बाद शहीद का गांव अब भी उपेक्षित है। डांडी गांव के संपर्क मार्ग की खस्ताहाल स्थिति को बयां कर रही है। गांव में शहीद स्मारक बनाने के लिए ग्राम सभा द्वारा जमीन दी गई थी जिसे दबंगों ने अपने नाम करा लिया। ऋषिकेश मुख्य हाईवे पर स्थापित किया गया शहीद कैैलाश मार्ग का पत्थर भी गिरा दिया गया था, जिसे परिजनों ने घर के पास लाकर स्थापित किया। मां सुशीला देवी ने कहा कि चुनाव के दौरान नेता केवल वोट के लिए आते हैं। माता-पिता कैलाश की शहादत और उसके देश के लिए न्यौछावर होने के जज्बे को याद कर उनकी आंखें नम हो जाती हैं।
शहीद कैलाश कुमार के गांव जाने वाला मार्ग कैलाश कुमार के नाम पर होना चाहिए था लेकिन उसे आज तक नहीं बनाया गया। गांव के एक विद्यालय को भी उनका नाम देने का प्रस्ताव था, वह भी अमल में नही आया है।
मोहित कपरूवाण, सामाजिक कार्यकर्ता।
शहीद कैलाश के गांव डांडी के संपर्क मार्ग को बनाने के लिए विभाग कार्ययोजना बना रहा है। गांव में सिंचाई की नहर के भूमिगत होने की प्रक्रिया के कारण विलंब हुआ है। विभाग जल्द प्रस्ताव तैयार सड़क का निर्माण कराएगा।
बलराम मिश्रा, अधिशासी अभियंता ,लोनिवि।