मर्यादित जीवन जीना सिखाती है रामायण
--तुलसी मानस मंदिर में मानस कथा का दूसरा दिन
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
गोस्वामी तुलसी दास की जयंती के उपलक्ष्य में रामायण प्रचार समिति के 32वें वार्षिकोत्सव के तहत आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन प्रवचन करते हुए कथावाचक ने मर्यादा पुरुषोत्तम की महिमा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने धरती पर साधारण मनुष्य के रूप में जन्म लेकर कई परेशानियों का सामना किया। भगवान चाहते तो पल भर में सभी परेशानियों से निजात पा सकते थे, मगर प्रभु राम ने दुश्वारियों का सामना कर मनुष्य को जीवन में आने वाली दिक्कतों से लड़ने की कला व धैर्य बनाए रखने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि रामायण का श्रवण करने से मनुष्य के भीतर नित्यकर्म की भावना जागृत होती है, और जीवन को मर्यादा में रहकर जीने की कला विकसित होती है। कथावाचक ने कहा कि रामायण के वाचन, श्रवण और चिंतन से कलियुग की सभी समस्याओं का समाधान संभव है। कथावाचक ने भक्तों से ईश्वर भक्ति के साथ मानव सेवा से जीवन को जोड़ने के लिए प्रेरित किया। उधर, धार्मिक अनुष्ठान के तहत आचार्य धनंजय शास्त्री ने संगीतमय अखंड रामायण पाठ किया। धार्मिक अनुष्ठान में सतीश घिल्डियाल, दीपक बधानी, समिति के संस्थापक पंडित गोपालाचार्य शास्त्री, कपिल गुप्ता, आशु डंग, ललित मोहन मिश्रा, अभिषेक शर्मा, अनुराग जोशी, राजीव लोचन, मनमोहन शर्मा, वेद प्रकाश शर्मा, राम चंद्रा, रीना शर्मा, मीना देेवी आदि शामिल हुए।