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कांवड़ यात्रा से सिडकुल इकाइयों को हुआ भारी नुकसान

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
कांवड़ यात्रा में यातायात बाधित रहने से 14 से 21 जुलाई तक सिडकुल की फैक्ट्रियों में 60 प्रतिशत काम प्रभावित हुआ। इससे लघु और बड़े उद्योगों को करीब 1500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। साथ ही सिडकुल के एक लाख श्रमिक भी प्रभावित हुए। अकेले दवाई उद्योग को कांवड़ यात्रा की कीमत 500 करोड़ रुपये के नुकसान से चुकानी पड़ी है।
सिडकुल की फैक्ट्रियों पर कांवड़ यात्रा का विपरीत असर पड़ा। यातायात बाधित होने और भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक से 14 से 21 जुलाई तक फैक्ट्रियों में उत्पादित माल नहीं निकल सका। कच्चा माल नहीं होने से बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों के पहिये रुक गए। कास्मेटिक एवं फूड के सामान की आईटीसी कंपनी, यूनिलीवर, केवीन एंड केयर, एशियन वायर, आरबीट, मिल्टन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, हीरो मोटो कॉर्प आदि बड़ी कंपनियों के काम ठप पड़ गए। इन कंपनियों का 60 प्रतिशत काम प्रभावित हुआ। करीब 80 लघु उद्योगों में कच्चा माल न पहुंचने और आर्डर पहले से ही बंद होने से ठप पड़ गए। सेवा के अध्यक्ष हीमेश कपूर की मानें तो इन पांच दिनों में लघु उद्योगों को पांच करोड़ का नुकसान हुआ है, जबकि बड़ी कंपनियों के नुकसान का आकलन करना मुश्किल है। औद्योगिक एसोसिएशन के वाइस चेयरमैन नरेश जैन ने बताया कि यात्रा के बीच-बीच में बिजली सप्लाई भी बाधित होती रही, इससे भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि कुछ उद्यमों के पास जनरेटर भी नहीं है।
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दवाई कंपनी पर रहा बड़ा असर
कांवड़ यात्रा का सबसे बड़ा असर दवा कंपनियों पर पड़ा। देश की 10 प्रतिशत दवाइयों की सप्लाई हरिद्वार की कंपनियों से होती है। अकेले एकमस, सिलिका जैसी कंपनियों को दवाई सप्लाई न होने और कच्चा माल न आने से भारी नुकसान है। सेवा के अध्यक्ष हीमेश कपूर ने बताया कि करीब 25 कंपनियों को 40 प्रतिशत तक नुकसान उठाना पड़ा है। इससे करीब 500 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन है।
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नहीं बन सका वैकल्पिक मार्ग
सिडकुल से सामान निकालने की व्यवस्था कराने को रोशनाबाद से छुटमलपुर के लिए रास्ता बनना था। इसके लिए सिडकुल और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में सैकड़ों बार वैकल्पिक मार्ग के सुझाव एसोसिएशन के पदाधिकारी दे चुके हैं। सेवा के अध्यक्ष हीमेश कपूर और नरेश जैन ने बताया कि बैठक के दौरान तो सभी अधिकारी स्वीकार करते हैं कि इस ओर पूरा ध्यान दिया जाएगा और शीघ्र ही कार्य शुरू किया जाएगा। अब कांवड़ यात्रा में नुकसान हुआ तो फिर से वैकल्पिक मार्ग की बात उठाई गई।
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