फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छात्राओं के आंदोलन के आगे झुका शिक्षा विभाग, वार्डन को पद से हटाया

विज्ञापन
विज्ञापन
घाट (चमोली)। आखिरकार छात्राओं के आंदोलन के आगे झुके शिक्षा विभाग ने कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की वार्डन को हटाकर उसके मूल विद्यालय जूनियर हाईस्कूल नाकोट भेज दिया है। वहीं, छात्राओं को आंदोलन के लिए किसने उकसाया, इसकी जांच के लिए राजस्व और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की गई है। रविवार को जांच टीम की ओर से विद्यालय में करीब तीन घंटे तक छात्राओं से पूछताछ भी की गई। पूरे मामले में दो महिला कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।
विज्ञापन

शनिवार शाम छह बजे अभिभावक को छात्रा से न मिलने देने से आक्रोशित करीब 90 छात्राएं हॉस्टल का गेट खोलकर नारेबाजी कर घाट तहसील मुख्यालय पहुंच गईं थी। यहां छात्राओं ने तहसीलदार सोहन सिंह रांगड़ से वार्डन के स्थानांतरण की मांग उठाई। छात्राओं के आंदोलन को देखते हुए तहसीलदार ने मुख्य शिक्षा अधिकारी ललित मोहन चमोला और एसडीएम परमानंद को घटना की जानकारी दी। सूचना जब जिलाधिकारी आशीष जोशी को मिली तो उन्होंने तत्काल शिक्षा विभाग के अधिकारियों और एसडीएम को मौके पर भेजा। रात करीब ग्यारह बजे जब जिला शिक्षा अधिकारी आशुतोष भंडारी ने वार्डन सरला डिमरी को पद से हटाकर मूल विद्यालय भेजने का आदेश जारी किया तब जाकर छात्राएं शांत र्हुइं और हॉस्टल लौट आईं।
घाट के तहसीलदार सोहन सिंह रांगड़ का कहना है कि मामले की जांच के लिए राजस्व और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई है। यह भी जांच की जा रही है कि छात्राओं को आंदोलन के लिए किसने उकसाया। वार्डन पर लगे आरोपों की भी जांच की जा रही है। जल्द ही विद्यालय में नई वार्डन की तैनाती कर ली जाएगी। (ब्यूरो)
विज्ञापन


क्या कहती हैं वार्डन
छात्राओं के साथ कभी भेदभाव नहीं किया। छात्राओं को बच्चों की तरह रखा, लेकिन विद्यालय के ही कुछ कर्मचारियों की ओर से छात्राओं को मेरे खिलाफ भड़काया गया। विद्यालय और हॉस्टल की बेहतरी के लिए मैंने बहुत मेहनत की। अपने संसाधनों से इनवर्टर लगवाया। स्वेच्छा से मूल विद्यालय जाने की मांग की। -सरला डिमरी, पूर्व वार्डन, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय

विद्यालय में सुविधाएं कम, दिक्कतें ज्यादा
कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय का हाल
12 में से चार शौचालय पड़े हैं बंद, शिक्षिकाएं भी नहीं
प्रमोद सेमवाल
गोपेश्वर। घाट ब्लॉक मुख्यालय स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय खुलने के समय से ही बुरे दौर से गुजर रहा है। विद्यालय में न तो पूर्णकालिक शिक्षिकाएं हैं और ना ही छात्राओं के रहने की पर्याप्त जगह। स्थिति यह है कि 50 बेड वाले हॉस्टल में 117 छात्राएं रह रही हैं। विद्यालय में 12 शौचालयों में से चार बंद पड़े हैं। कहना गलत नहीं होगा की आवासीय विद्यालय में सुविधाएं कम दिक्कतें ज्यादा हैं।
घाट ब्लॉक मुख्यालय में वर्ष 2005 में केंद्र सरकार द्वारा पोषित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय खोला गया था। यहां छठी से आठवीं कक्षा तक की बालिकाओं को निशुल्क शिक्षा और हॉस्टल की सुविधा दी जाती हैं। वर्ष 2008 में केंद्र की तर्ज पर इसी विद्यालय में राज्य सरकार ने भी नौवीं से बारहवीं तक की कक्षाओं का संचालन शुरू किया। यहां छठी से आठवीं तक 48 और नौवीं से बारहवीं तक 69 छात्राएं पढ़ती हैं, लेकिन विद्यालय में हॉस्टल और शौचालय की पर्याप्त सुविधा नहीं है जिससे छात्राओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मौजूदा समय में 50 बेड वाले हॉस्टल में 117 छात्राएं रह रही हैं। इन छात्राओं के पठन-पाठन के लिए तीन पूर्णकालिक शिक्षिकाओं के पद सृजित हैं, लेकिन यहां मात्र दो अल्पकालीन शिक्षिकाएं तैनात हैं। हॉस्टल में 12 में से सिर्फ आठ शौचालय ही सही स्थिति में हैं।
जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष प्रभा रावत का कहना है कि कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय घाट की समस्याओं को लेकर शीघ्र निरीक्षण किया जाएगा। यहां जो भी समस्याएं दिखेंगी, उन्हें बाल संरक्षण आयोग को भेजा जाएगा।

कोट
कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय का नया भवन निर्माणाधीन है। यह एक वर्ष के भीतर बनकर तैयार हो जाएगा। शासन को विद्यालय में शिक्षिकाओं की तैनाती के लिए लिखा जाएगा। विद्यालय में जो भी समस्याएं हैं, उन्हें पूर्ण करने के लिए शिक्षा विभाग को कह दिया गया है। परमानंद, अध्यक्ष, कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, घाट, चमोली

पांच कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में बनेेंगे टैंक
रेनवाटर हार्वेस्टिंग टैंक से दूर होगी पेयजल किल्लत
अमर उजाला ब्यूरो
नई टिहरी।
पेयजल संकट से जूझ रहे टिहरी जिले के पांच कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और उनके छात्रावासों में बरसाती जल संग्रहित कर पेयजल किल्लत दूर की जाएगी। मनरेगा से प्रत्येक विद्यालय में दो-दो रेन वाटर हार्वेस्टिंग टैंक का निर्माण किया जाना है। निर्माण कार्य करने के लिए मनरेगा के तहत नौ लाख रुपये का बजट स्वीकृति हुआ है।
जिले के नरेंद्रनगर ब्लॉक के आमपाटा, भिलंगना के रौंसाल, जौनपुर के रौतुकी बेली, थौलधार के कौशल और प्रतापगनर के सुजड़गांव में लंबे समय से राजकीय कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों एवं छात्रावासों में पर्याप्त पेयजल की सुविधा नहीं होने से छात्राओं को पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। कुछ माह पहले मुख्य विकास अधिकारी आशीष भटगांई ने कई विद्यालयों का निरीक्षण कर छात्राओं की परेशानियों को सुना था। छात्राओं की समस्याओं को देखते हुए सीडीओ भटगांई ने पांचों स्कूलों एवं छात्रावासों में 10-10 हजार लीटर के रेनवाटर हार्वेटिंग टैंकों के निर्माण की स्वीकृति दी है। मनरेगा के तहत नौ लाख से 10 टैंकों का निर्माण किया जाएगा।

इनका है कहना-
मनरेगा से टैंक निर्माण की स्वीकृति दे दी गई है। टैंकों के निर्माण होने से जहां वर्षा जल संग्रहित होगा, वहीं छात्राओं को भी पानी मिल पाएगा।-आशीष भटगांई, मुख्य विकास अधिकारी टिहरी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें