गोपेश्वर। सेमा गांव में मनरेगा योजना के तहत वर्ष 2014-15 और 2015-16 में हुए विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। मनरेगा लोकपाल शेखर रावत ने ग्राम पंचायत सेमा में कार्यरत ग्राम विकास अधिकारी से 9720 रुपये की वसूली के आदेश दिए हैं। साथ ही तत्कालीन बीडीओ, वीडीओ और ग्राम रोजगार सेवक पर एक-एक हजार अर्थदंड लगाया।
घाट ब्लॉक के सेमा गांव निवासी रामसिंह ने बीते वर्ष सात दिसंबर को गांव में मनरेगा के तहत हुए कार्यों में वित्तीय अनियमितता की शिकायत मुख्य विकास अधिकारी से की थी। इसके बाद मामला जांच के लिए 24 दिसंबर 2016 को मनरेगा लोकपाल के पास पहुंचा। लोकपाल ने इस वर्ष 23 मार्च को जब खंड विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम सेवक के बयान लिए तो उन्होंने सभी कार्यों को पूर्ण करने और कार्यों का संपूर्ण भुगतान कर देने की बात कही। जबकि गांव में मनरेगा कार्यों के दस्तावेजों और निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया गया तो खिदारी से कोलावाड़ी तक निर्मित सिंचाई गूल में 1520 रुपये का भुगतान न करने की पुष्टि हुई। साथ ही धरसारी और अमिलबाड़ी तोक में टैंक निर्माण में 9720 रुपये का भुगतान नहीं किया गया। मनरेगा लोकपाल शेखर रावत ने कहा कि मनरेगा कार्यों में वित्तीय अनियमितता गंभीर मामला है। उन्होंने सेमा गांव में कार्यरत ग्राम विकास अधिकारी विजय सिंह नेगी से 9720 रुपये की वसूली के आदेश राजस्व विभाग को दिए हैं। साथ ही तत्कालीन खंड विकास अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम रोजगार सेवक को मनरेगा योजना में दोषी पाते हुए एक-एक हजार का अर्थदंड लगाया। उन्होंने जिला विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि संबंधित कर्मियों की ओर से यदि भविष्य में भी ऐसी लापरवाही और अनियमितता की गई तो उनके खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाए।