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मानवीय हस्तक्षेप से सूख रहे प्राकृतिक पेयजल स्रोत

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गोपेश्वर। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की ओर से जल संरक्षण पर आयोजित कार्यशाला में जिले के 40 जल दूतों (जल संरक्षण कार्यकर्ता) ने प्रतिभाग किया। जल दूतों ने जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में प्राकृतिक पेयजल स्रोतों के निरीक्षण के अपने अनुभव साझा किए और पानी के संरक्षण पर सुझाव दिए। जल दूतों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप से प्राकृतिक पेयजल स्रोत सूख रहे हैं।
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विकास भवन के सभागार में आयोजित कार्यशाला में डीएम आशीष जोशी ने कहा कि भविष्य में भारी पेयजल किल्लत से निपटने के लिए अभी से जल प्रबंधन जरूरी है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकाधिक चाल-खाल और जल प्रबंधन कार्य पर जोर दिया। नाबार्ड के डीडीएम आशीष भंडारी ने कहा कि 15 मई से 30 जून तक जल संरक्षण पर जागरूकता अभियान चलाया गया। जाखेश्वर शिक्षण संस्थान के जल दूतों ने 75, जन मेत्री जोशीमठ ने 125 और श्री नंदा देवी महिला लोक विकास समिति के दूतों ने 325 गांवों का भ्रमण कर वहां पानी के लिए जागरूकता अभियान चलाया। जल दूत अनीता ने ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे तालाब, चाल-खाल, पानी के रिचार्ज पिट बनाने पर जोर दिया। इस मौके पर नाबार्ड के डीजीएम वाईपी अग्रवाल, श्री नंदा देवी महिला लोक विकास समिति की सचिव किरन पुरोहित और सुमित वर्मा आदि मौजूद थे।
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