कर्म से होता है व्यक्तित्व का निर्धारण: मीना
पुण्यतिथि पर किया जगदंबा सरस्वती का नमन
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सेवा केंद्र अनुभूतिधाम मिस्सरपुर के सभागार में मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती मम्मा की 52वीं पुण्यतिथि पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर राजयोगिनी बीके मीना ने कहा कि दुनिया में अनेक आत्माएं आती और चली जाती हैं किंतु कुछ आत्माएं अपने कर्मों से इस दुनिया में विशेष स्थान बना लेती हैं। व्यक्ति के व्यक्तित्व की पहचान उसके कर्मों से होती है। उन्होंने कहा कि मम्मा का व्यक्तित्व भी कुछ ऐसा ही था वह जो कहती थीं उसे करके भी दिखाती थीं। चाहे कैसी भी परिस्थिति हो वह सदैव मुस्कराती रहती थीं।
अक्रियधाम आश्रम के अध्यक्ष स्वामी अलखानंद अक्रिय महाराज ने मम्मा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि शरीर में जब आत्मा है तो वह चैतन्य है। आत्मा निकल जाए तो वह जड़ है। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के वरिष्ठ सेनानायक शिवकुमार ने कहा कि समाज की विभिन्न प्रकार की कुरीतियां है, परंतु अपने सत्कर्मों से और सकारात्मक सोच से इसको बदल सकते हैं। मनुष्य की स्मृति श्रेष्ठ होगी और जीवन से तनाव खत्म हो जाएगा उसका आधार मनुष्य की श्रेष्ठ स्मृति हैं। मंच का संचालन बीके सुशील ने किया उन्होंने सबका आभार जताया।
कार्यक्रम में केके गुप्ता, डा. रामानंद, रामलखन श्रीवास्तव, राजकुमार एडवोकेट, कमल नेगी, पूनम गौड, सुनीता गोले, सर्वेश देवी, संतोष देवी, बीके सरस्वती, बीके प्राची, बीके सरिता, बीके नेहा आदि उपस्थित थे।