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मां स्कंदमाता की पूजा कर व्यावहारिक ज्ञान को कर्म में किया परिवर्तित

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ब्यूरो/अमर उजाला।
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देहरादून। चेत्र नवरात्र के पांचवें दिन (बुधवार) घर-घर और मां के मंदिरों में भक्तों ने विधि-विधान से स्कंदमाता की पूजा अर्चना की। शहर में जगह-जगह सजे पंडालों में भक्तों ने मां की आराधना कर सुंदर भजन गाकर माहौल को और भी भक्तिमय कर दिया।
मां स्कंदमाता की पूजा कर भक्तों ने अपने व्यावहारिक ज्ञान को कर्म में परिवर्तित किया। सुबह से देवी मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में पूजा अर्चना के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। उपवास रखकर कई श्रद्धालुओं ने मां को पान, सुपारी, चुनरी, नारियल अर्पण कर घर-परिवार में सुख समृद्धि की कामना की। प्राचीन टपकेश्वर महादेव मंदिर, किशनपुर, कैनाल रोड स्थित प्राचीन शिव मंदिर, नेहरू कॉलोनी स्थित सनातन धर्म मंदिर आदि में श्रद्धा व विश्वास के साथ मां स्कंदमाता की आराधना की गई। साथ ही इन मंदिरों में दिनभर मां के भजन कीर्तन चलने से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
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रामकथा के शुभारंभ में निकाली कलश यात्रा
देहरादून। श्री पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर में श्रीराम कथा के शुभारंभ पर मंदिर समिति की ओर से कलश यात्रा निकाली गई। व्यास ललित सारस्वत ने भक्तों को राम कथा सुनाई।
बुधवार सुबह मंदिर में पंचम नवरात्र में मां भगवती के पंचम स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर पंडित भारत भूषण ने कहा कि मां की भक्ति करने से काम, क्रोध और लोभ का विनाश होता है। कथा व्यास ललित सारस्वत ने कहा कि जो श्रीराम कथा सुन लेता है उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इससे पहले महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। सेवादारों ने पवित्र रामायण को अपने सिर पर धारण कर यात्रा में भाग लिया। मौके पर दिगंबर भागवत पुरी, नवीन गुप्ता, सुनील गोयल, ललित आहूजा, प्रीति गुप्ता, राजकुमार गुप्ता, विक्की गोयल, राजेेंद्र आनंद, नरेंद्र ठाकुर, अनुराग अग्रवाल आदि मौजूद रहे।

कथा कीर्तन के रूप में मनाया ज्योति जोत दिवस
देहरादून। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, आढ़त बाजार में श्री गुरु अंगद देव और श्री गुरु हरगोविंद जी का ज्योति जोत दिवस कथा कीर्तन के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर शबद गायन कर गुरु की महिमा सुनाई। बुधवार सुबह प्रातरू नितनेम के बाद चरनजीत सिंह ने आशा दी वार का शबद दल भंजन गुर सूरमा बढ़ योद्धा बहु पर उपकारी, सूरज किरन मिले जल का जल हुआ राम का.. गायन कर संगतों को निहाल किया।
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इस अवसर पर हैड ग्रंथी शमशेर सिंह ने कहा कि गुरु अंगद देव ने गुरू के हुक्म के अनुसार सारा जीवन सेवा भाव में लगा दिया। छठे गुरु हरगोविंद सिंह ने भी अकाल तख्त साहिब की ग्वालियर के किले से 52 राजाओं को मुक्त किया। जिससे उन्हें बंदी छोड़ गुरु का दर्जा दिया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगमिनदर सिंह छाबड़ा, सेवा सिंह मठारू, मनजीत सिंह, सतनाम सिंह, अजीत सिंह, मालिक सिंह, जसवंत सिंह, सप्पल गुरुचरन सिंह, वीवी जीत कौर आदि मौजूद रहे।
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