ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था सितंबर से पीपीपी मोड में शुरू होने की उम्मीद है। निगम अधिकारियों के मुताबिक पीपीपी मोड में कूड़ा उठान से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी।
ऐसे में मौजूदा समय में लगे एजेंसी कर्मचारियों के वेतन समेत अन्य मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने के चलते वार्डों से कूड़ा नहीं उठने की समस्या से भी निजात मिलेगी। नगर निगम प्रशासन ने पिछले वर्ष अक्तूबर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड में देने का निर्णय लिया था। पिछले वर्ष नवंबर में टेंडर कराए गए, जिसके बाद चेन्नई एमएसडब्ल्यू कंपनी को डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का कार्य दिया गया। लेकिन, कंपनी के साथ अनुबंध पत्र में नगर आयुक्त के हस्ताक्षर नहीं होने के चलते अभी कार्य शुरू नहीं हो पाया है। नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदंडे के मुताबिक इस महीने के अंत तक अनुबंध पत्र में हस्ताक्षर हो जाएंगे। सितंबर से कंपनी की ओर से कूड़ा उठान शुरू कर दिया जाएगा। कहा कि वर्तमान में एजेंसी के जरिए रखे गए आउससोर्स कर्मचारियों में जो बेहतर कार्य कर रहे हैं, उन्हें कंपनी में समायोजित कर दिया जाएगा।
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हर महीने खर्च होते हैं 50 लाख रुपये
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन में निगम हर माह करीब 50 लाख रुपये खर्च करता है, जबकि इसकी तुलना में वर्तमान में उसे केवल करीब 9-12 लाख रुपये ही मिल रहे हैं। ऐसे में कूड़ा उठान पीपीपी मोड में दिए जाने के बाद न केवल नगर निगम की आय में इजाफा होगा बल्कि उसे आए दिन खराब होने वाले वाहनों और कर्मचारियों की समस्याओं से भी निजात मिलेगी।
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अनुबंध पत्र में कुछ संशोधन के चलते इस पर हस्ताक्षर नहीं हो पाया है। अगस्त में कंपनी के साथ करार होने के बाद सितंबर से कूड़ा उठान पीपीपी मोड में शुरू कर दिया जाएगा।
- विजय कुमार जोगदंडे, नगर आयुक्त