हरे पेड़ काटने के लिए फिर होगा रिसर्च
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। देवभूमि में 1000 मीटर व इससे अधिक ऊंचाई पर खड़े हरे पेड़ों के कटान के बाद पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का रिसर्च कराया जाएगा। वन अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों की इस रिपोर्ट के बाद कि ऊंचाई पर स्थित हरे पेड़ों को काटा जा सकता है, इसके बाद वन विभाग ने अपने स्तर पर इसका रिसर्च कराने का निर्णय लिया है। प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने इसके लिए उच्च स्तरीय आठ सदस्यीय कमेटी भी गठित कर दी है, जो तीन माह में अध्ययन कर रिपोर्ट देगी।
वन अनुसंधान संस्थान ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि देवभूमि में समुद्र तल से 1000 मीटर व इससे अधिक ऊंचाई पर स्थित हरे पेड़ों के काटने से पर्यावरण पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। हरे पेड़ों के काटने के बाद पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर विभागीय स्तर पर रिसर्च कराया जा रहा है, जिसके लिए आठ सदस्यीय कमेटी भी गठित कर दी गई है। कमेटी तीन माह में तमाम पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट देगी। उस रिपोर्ट के आधार पर ही भविष्य के लिए कोई निर्णय लिया जाएगा। कमेटी की रिपोर्ट को राज्य सरकार के जरिये केंद्र सरकार को भी भेजा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व वन विभाग की ओर से आंतरिक रिसर्च कराया गया था, जिसमें यह बात सामने आई थी कि इतनी ऊंचाई पर खड़े पेड़ों के कटान का सीधा असर पर्यावरण पर पड़ेगा। फिलहाल वन विभाग की ओर से हरे पेड़ों के कटान पर प्रतिबंध है। इसमें किसी भी प्रकार की ढील देने की कोई योजना भी नहीं है। लेकिन अब जबकि वन अनुसंधान संस्थान ने अपनी रिपोर्ट दी है तो उस रिपोर्ट के साथ ही विभागीय रिपोर्ट से जुड़े तमाम पहलुओं का रिसर्च की जरूरत है।
बता दें कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘ऑल वेदर रोड’ प्रोजेक्ट के लिए राज्य में 1000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित न पेड़ों का कटान होना है। इसका पर्यावरण पर क्या प्रभाव होगा, इस पर विभाग में मंथन चल रहा है। उसके के मद्देनजर इस रिसर्च की जरूरत महसूस की गई।
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टीम में इन अफसरों को किया गया है शामिल
प्रमुख वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष जयराज की ओर से गठित टीम में प्रमुख वन संरक्षक मोनिष मलिक, अपर प्रमुख वन संरक्षक डीजेके शर्मा, अपर प्रमुख वन संरक्षक वीके पांगती, मुख्य वन संरक्षक डॉ. कपिल जोशी, भुवन चंद्र, मनोज चंद्रन, डॉ. विवेक पांडे व वन अनुसंधान संस्थान की ओर से दो विशेषज्ञ को शामिल किया गया है। मुख्य वन संरक्षक जयराज का कहना है कि यदि कमेटी के सदस्य चाहें तो अपने साथ कुछ और विशेषज्ञों को शामिल कर सकते हैं।
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एक हजार से अधिक ऊंचाई पर स्थित पेड़ों के कटान के बाद पर्यावरण पर पड़ने वाले असर के अध्ययन को लेकर समिति गठित कर दी गई है। जो तीन माह में रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट को राज्य सरकार के जरिये केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा जाएगा। उसके बाद सरकार से जो दिशा-निर्देश मिलेंगे उन पर कार्य किया जाएगा।
- जयराज, प्रमुख वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष