ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
समाज का कर्तव्य है कि वह अपने आसपास के प्लास्टिक को अपशिष्ट मुक्त करने के साथ ही लोगों को जागरूक करें। यह बातें सीआईआई-यूको सिस्टम सेवा और प्लास्टिक अपशिष्ट मुक्त उत्तराखंड पर केंद्रित यूसीओएसटी के नौंवे पर्यावरण शिखर सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने कहीं। सम्मेलन में उत्तराखंड को प्लास्टिक मुक्त बनाने पर मंथन किया गया।
उत्तराखंड ग्रामीण विकास और प्रवासन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी ने कहा कि प्लास्टिक को अपशिष्ट मुक्त करने में सामाजिक दायित्व और कर्तव्य के प्रति लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। हमारे पड़ोसी राज्य हिमाचल ने प्लास्टिक के उपयोग, प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध लगाने और प्लास्टिक वस्तुओं का उपयोग कम करने के लिए एक संस्थागत तंत्र विकसित करने में अलग भूमिका निभाई है। यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने कहा कि इस तरह के सम्मेलन से लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक होते हैं। उत्तराखंड राज्य परिषद के चेयरमैन डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि जब तक लोग सार्वजनिक स्थानों, बुनियादी ढांचे और शहरों को स्वयं के रूप में नहीं देखते तब तक स्वच्छता और अपशिष्ट निर्माण समाप्त नहीं होगा। सीआईआई उत्तराखंड राज्य परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस फारूक ने कहा कि प्राकृतिक संसाधन हमारे गहने हैं। हमें संरक्षण के उपाय करने चाहिए। दो दिन तक चले सम्मेलन में उद्योग, संस्थानों, अकादमिक, एनजीओ और पर्यावरण के क्षेत्र में विशेषज्ञों के 100 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ 10 विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर परिषद के पूर्व अध्यक्ष राकेश अग्रवाल, डॉ. सनत कुमार, विपिन कुमार, विपुल अरोड़ा आदि मौजूद रहे।