बच्चों के जीवन से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्कूली वाहनों में खामियों पर नाराजगी जताई है। आयोग के अध्यक्ष ने मंगलवार को मुख्य सचिव को पत्र लिख परिवहन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्कूल बसों में नियम पालन के लिए पुलिस को जिम्मेदारी सौंपने का सुझाव दिया है।
बाल आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूड़ी ने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने बताया कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग गंभीर नहीं है। पिछले दिनों आयोग की सदस्य सीमा डोरा ने स्कूली वाहनों का निरीक्षण किया था, जिनमें उन्हें अनेक खामियां मिलीं थीं। इस मामले में सबसे अधिक लापरवाही आरटीओ देहरादून की पाई गई है। विभाग की लापरवाही से बच्चों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। अगर परिवहन विभाग स्कूली वाहनों को लेकर बने नियमों का पालन नहीं करा पा रहा है तो इस कार्य को पुलिस को दे देना चाहिए। उन्होंने मामले में कार्रवाई कर आयोग को अवगत कराने की बात कही।
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निरीक्षण के दौरान मिली थीं ये खामियां
- प्रदेश के सभी जिलों में आरटीओ की ओर से स्कूली बसों की नियमित चेकिंग नहीं की जा रही है। देहरादून की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है।
- वाहनों में निर्धारित संख्या से अधिक बच्चे बैठाए जा रहे हैं।
- ड्राइवर बगैर लाइसेंस वाहन चला रहे हैं, जबकि स्कूली वाहन चलाने के लिए कम से कम पांच वर्ष का अनुभव जरूरी है।
- अधिकांश ड्राइवरों और कंडक्टरों का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं हुआ है।
- जिस वाहन में छात्राएं जा रही हैं, उस वाहन में महिला सहायक नहीं है।
- अधिकांश वाहन ओवर स्पीड में चलते हैं, उनमें स्पीड गवर्नर नहीं लगे हैं।
- वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स एवं अग्निशमन की व्यवस्था नहीं है।
- अधिकांश वाहनों में जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं।
- आपातकालीन स्थिति में सचेत करने के लिए वाहनों में अलार्म नहीं लगे हैं।
- ड्राइवरों का हर साल मेडिकल चैकअप नहीं करवाया जाता है।
- ड्राइवरों को हर वर्ष ट्रेनिंग कोर्स नहीं कराया जाता है।