ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
डीएवी कॉलेज खुलने का समय भले ही दिन का हो लेकिन रात के 12 बजे भी यहां दाखिले हो सकते हैं। रिटायर्ड जज इंद्रजीत मल्होत्रा की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसके अलावा कॉलेज में एडमिशन और मेरिट के कई खेल की भी पोल खुली है। जांच रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों पर अगर कार्रवाई हुई तो इस गड़बड़ी से जुड़े कई शिक्षक भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। हालांकि कॉलेज प्रबंधन ने इस पूरे मामले पर कार्रवाई को अलग से समिति गठित की हुई है।
डीएवी पीजी कॉलेज में प्रिंसिपल डा. देवेंद्र भसीन की सक्रियता से लॉ में हुए 29 फर्जी दाखिले और इसके बाद बीए में हुए दो फर्जी दाखिलों पर सख्त कार्रवाई हुई। सभी दाखिले रद्द हुए। फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ एफआईआर हुई। इन सबके बीच भी कॉलेज के कई शिक्षकों-कर्मचारियों के खेल से अजब बातें सामने आई हैं। उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया है कि छात्रसंघ चुनाव के दौरान रात को 12 बजे से दो बजे के बीच तमाम दाखिले किए गए। इनका पता तब चला जब ऑनलाइन एडमिशन की आईडी जेनरेट हुई। यहां यह भी बात सामने आई है कि चोरी-छिपे मेरिट के बावजूद बैकडेट में कुछ दाखिले किए गए। ऐसे गंभीर आरोपों से भरी रिपोर्ट पर ही यूजीसी ने विजिलेंस जांच बैठाई है। उधर, कॉलेज प्रबंधन यूजीसी को अपना जवाब देने जा रहा है। चूंकि रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है, लिहाजा उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही यूजीसी से रुकी हुई ग्रांट और शोध प्रोजेक्ट का बचा हुआ फंड मिल जाएगा। डीएवी कॉलेज प्राचार्य डा. देवेंद्र भसीन के मुताबिक कालेज में सभी प्रवेश कड़ाई से मेरिट पर हो रहे हैं। वर्ष 2015 में एक प्रवेश पर विवाद होने पर उसकी प्रक्रिया उन्होंने रोक दी थी। उस बारे में प्रशासन व प्रबंधन स्तर पर जांच के बाद कुछ भी गलत नहीं पाया गया।
ऐसे मिली जानकारी
डीएवी कॉलेज के कुछ शिक्षक अपने शोध प्रोजेक्ट का फंड लेने यूजीसी गए थे। उन्हें बताया गया था कि फंड नहीं मिल सकता है। लिहाजा, शिक्षकों ने इसकी जानकारी प्राचार्य डा. देवेंद्र भसीन को दी। डा. भसीन ने अपने स्तर से यूजीसी को पत्र लिखकर वजह पूछी। उन्हें जांच रिपोर्ट का हवाला दिया गया। इसके बाद मामला कॉलेज प्रबंधन को भेज दिया गया। अब प्रबंधन मामले में अपना जवाब तैयार कर रहा है।
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नियमों के पालन से सुधर रहा डीएवी कालेज
इस साल विश्वविद्यालय द्वारा अनुमन्य 12,450 ही दाखिले
एक सप्ताह के भीतर शुरू होगी ई-लर्निंग लैब
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून।
पुराने रिकॉर्ड में भले ही डीएवी कॉलेज अनियमितताओं का अड्ड़ा रहा हो लेकिन अब कालेज की व्यवस्थाएं काफी हद तक दुरुस्त हो गई हैं। कालेज प्रशासन का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस साल विवि द्वारा अनुमन्य 12,450 ही दाखिले हुए हैं। छात्रों की संख्या 36 हजार से घटकर यहां पहुंच चुकी है।
डीएवी कॉलेज में एक सप्ताह के भीतर ई-लर्निंग लैब शुरू होने जा रही है। इसका मकसद छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी कराना है। कॉलेज प्राचार्य डा. देवेंद्र भसीन ने बताया कि कालेज में गत वर्ष 2.75 करोड़ रुपए की लागत से 18 कमरों का नया ब्लॉक बनकर पूरा हुआ है, जिसमें शिक्षण कार्य शुरू हो गया है। यूजीसी से भवन अनुदान व विकास अनुदान न मिलने का कारण कॉलेज का नैक निरीक्षण होना बाकी है। डीएवी कॉलेज प्राचार्य ने अनुसूचित जाति जनजाति के करीब सात करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में दो मुकदमे दर्ज कराए हैं। इसमें से 3.26 करोड़ के एक मामले में एसआईटी की जांच चल रही है।
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डीएसटी से एक करोड़ का अनुदान
डीएवी कॉलेज को केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से एक करोड़ रुपये का अनुदान मिला है। इसके अलावा यूकॉस्ट सहित विभिन्न सरकारी एजेंसियों के कई शोध प्रोजेक्ट कालेज में चल रहे हैं। ओएनजीसी के सहयोग से 20 लाख रुपये का बैडमिंटन हॉल पूरा होने वाला है। हाईकोर्ट के आदेश के तहत बायोमीट्रिक हाजिरी की व्यवस्था भी सुचारु चल रही है।