माघ पर्व की तैयारियां तेज, आयोजन 10 से
ब्यूरो/अमर उजाल/विकासनगर।
अलग संस्कृति के लिए पहचान रखने वाले जौनसार बावर में जनवरी माह शुरू होते ही माघ पर्व की तैयारियां तेज हो गई हैं। एक माह तक चलने वाले इस पर्व में हर घर में पकवान बनेंगे। पंचायती आंगन में हारुल और तांदी नृत्य की महफिल जमेगी।
10 जनवरी से माघ पर्व शुरू होने जा रहा है। इसके बाद एक महीने तक पंचायती आंगन में लोक संस्कृति की अनूठी छटा देखने को मिलेगी। जौनसार बावर क्षेत्र के हर गांव और घर में यह त्योहार काफी हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस पर्व के अवसर पर बाहर नौकरी और व्यवसाय करने वाले लोग भी अपने पैतृक गांव पहुंचते हैं।
पर्व का महत्व
मान्यता के अनुसार सैकड़ों वर्ष पहले क्षेत्र में किरमिर नामक राक्षस का आतंक था। उसे प्रतिदिन एक बलि चाहिए थी। किरमिर दानव का वास कर्मनाशा नदी (टोंस) में था। क्षेत्र के लोगों ने आतंक से मुक्ति को महासू और शिलगुर विजट देवता की आराधना की। पूर्वजों के अनुसर 27 गते पौष को महासू देवता के सेनापति कयलू महाराज ने किरमिर राक्षस का वध किया था। इसी दिन से हनोल मंदिर के पास कयलू महाराज के नाम से बकरा के बलि देकर उसका कुछ हिस्सा टोंस नदी में फेंका जाता है। इसके चलते क्षेत्र में बकरों की डिमांड भी बढ़ गई है। लोग बकरे के लिए 20-25 हजार रुपये तक देने को तैयार हैं।
‘बांटा’ नहीं तो रिश्ता नहीं
अनूठी संस्कृति के लिए विख्यात जौनसार बावर का यह पर्व अनूठा है। पर्व के दौरान प्रत्येक घर में बकरे को प्रसाद रूप में पकाने की परंपरा है। इसके तहत त्योहार के दिन प्रत्येक घर में बकरे की बलि दी जाती है और बकरे का एक हिस्सा विवाहित बहन और बेटी को भेजना जरूरी होता है। इसे स्थानीय भाषा में ‘बांटा’ कहा जाता है। यदि यह ‘बांटा’ नहीं पहुंचता तो रिश्ता टूट जाता है।