अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
मुस्लिम आबादी में इन दिनों चारों तरफ ईद उल फितर की तैयारियों का उल्लास है। बाजार देर रात तक ग्राहकों से गुलजार हो रहे हैं। कपड़े और सजावटी सामान की जमकर खरीदारी हो रही है। ईदगाह और मस्जिदों में ईद की नमाज की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बस ईद का चांद दिखने का इंतजार है। रविवार को चांद नजर आने पर सोमवार को ईद तय मानी जा रही है।
रमजान के बाद आने वाली ईद सबसे बड़ा त्योहार होने से हर परिवार में नए कपड़े जूते और जरूरत का सामान खरीदता है। अब ईद उल फितर में एक या दो दिन का समय बचा है। हालांकि पिछले दो महीनों में 30 दिन होने के चलते रमजान का महीना 29 दिन का होने की संभावना है। इस लिहाज से रविवार को चांद नजर आनेपर सोमवार को ईद का त्योहार मनाया जाएगा। इसे देखते हुए रोजेदार ईद के लिए कपड़े और घरों की साफ सफाई व सजावट में जी जान से जुटे हैं। घरों के अलावा इबादतगाहों को रंग बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। ज्वालापुर के पांवधोई सहित कई मुस्लिम बाहुल्य मोहल्लों में कई दिन पहले ही गली चौराहों पर सजावट कर दी गई है। रोजेदारों को सिर्फ और सिर्फ चांद के दीदार का इंतजार है।
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कमेटी और अफसरों ने किया ईदगाह का मुआयना
ईद उल फितर के मौके पर नमाज अदा करने वालों की सबसे ज्यादा भीड़ ज्वालापुर ईदगाह में जुटती है। यहां ज्वालापुर के अलावा आसपास के देहात से भी लोग नमाज अदा करने पहुंचते हैं। ईदगाह कमेटी के सदर हाजी इरफान अंसारी, सेक्रेटरी हाजी नईम अख्तर कुरैशी, नायब सदर हाजी रफी खान सहित कमेटी के मेंबरों ने शनिवार को ईदगाह पहुंचकर नमाज की तैयारियां कराई। इसी दौरान सीओ कनखल जयदेव आर्य और ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह भी ईदगाह पहुंचे और शांति व्यवस्था के लिहाज से तैयारियों का जायजा लिया। कमेटी के सेक्रेटरी हाजी नईम कुरैशी ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि ईदगाह नमाजियों से भर जाने के बाद मदरसा दारुल उलूम रशीदिया में भी नमाज अदा की जाती है। यहां मोहतमिम मौलाना आरिफ की ओर से नमाज में सहयोग किया जाता है।
रोजगार की कमी के चलते मंदा है बाजार
ईद के त्योहार पर इस बार बाजार में मंदी का असर देखने को मिल रहा है। व्यापारी खुद इस बात को महसूस कर रहे हैं। वहीं मुस्लिम समाज का एक बड़ा तबका बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के कामों से जुड़ा है। नोटबंदी के बाद जमीनों की खरीद फरोख्त और नए भवनों का निर्माण लगभग ठप हो गया है। कई रोजेदारों ने बताया कि महीनों से नियमित रोजगार नहीं मिल पा रहा है। त्योहार की खुशी अपनी जगह है, पर खाली जेब ईद की क्या मिठास।