जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर की सड़कों में मौत हर साल तांडव करती है। हर साल दर्जनों बेगुनाह काल के ग्रास में समा जाते हैं। खुद दुर्घटनाओं के आंकड़े इसकी भयावहता को बया करते हैं।
क्षेत्र में पिछले नौ साल में हुई अलग-अलग दुर्घटना में 140 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 320 से अधिक लोग घायल हुए। ज्यादातर हादसों के लिए या तो ओवरलोडिंग जिम्मेदार होती है, या फिर रास्तों की बदहाली।
क्षेत्र की ज्यादातर सड़कों पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। कई जगहों पर सेफ्टी के नाम पर न तो पैराफिट है और न ही कोई साईन बोर्ड। शनिवार को भी हुए हादसे की एक बड़ी वजह यह रही कि हादसे वाली जगह पर सड़क सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे। एआरटीओ रत्नाकर ने भी घटना स्थल का मुआयना किया।
उन्होंने भी इस बात को स्वीकारा कि घटना की एक बड़ी वजह पैराफिट और क्रैश वॉल का न होना था। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक लोग प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा भुगतेंगे। कब तक जौनसार बावर की सड़कों में मौत का तांडव चलेगा और बेगुनाहों की जानें जाती रहेंगी।
क्षेत्र में प्रशासन ने सड़कों का जाल तो बिछा दिया, लेकिन उनकी दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है।
इन सड़कों पर रोजाना लोगों को जान हथेली पर रख कर सफर करना पड़ता है। कालसी और चकराता विकासखंड में 10 प्रमुख मार्गों के साथ ही 206 संपर्क मार्ग हैं। लेकिन ज्यादातर सड़कों पर सुरक्षा के कोई इंतजाम ही नहीं है।
अधिकारी हर बार सड़क सुरक्षा के इंतजाम के वादे करता है। लेकिन इसके बाद बजट का बहाना बता अपने ही वादे से मुंह फेर लेता है। लोनिवि के अधिशासी अभियंता मुकेश परमार ने कहा कि ऐसी जगहों को चिन्हित किया जा रहा है जहां पर पैराफिट और क्रैश वॉल निर्माण की आवश्यकता है।