आयोग ने की बाल उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी और सदस्यों ने शुक्रवार को आयोग कार्यालय में पांच मामलों की सुनवाई की। जिनमें एक मामले में डाउन सिंड्रोम मामले में आरोपी डॉ. अर्चना लूथरा आयोग में पेश हुईं और अपने बचाव में दस्तावेज उपलब्ध कराए, वहीं पीड़ित पक्ष ने भी मेडिकल जांच संबंधी साक्ष्य आयोग में पेश किए। इसके अलावा बच्चों के उत्पीड़न से संबंधित मामलों की सुनवाई हुई।
डाउन सिंड्रोम मामले में आरोपी डॉ. अर्चना लूथरा आयोग के कार्यालय में पेश हुईं। सुनवाई के दौरान डॉ. लूथरा की ओर से दस्तावेज आयोग को उपलब्ध कराए गए। जबकि शिकायतकर्ता कुमकुम और उनके पति दुष्यंत कुमार ने अपने पक्ष में बच्चे की बीमारी से संबंधित और डॉक्टरों द्वारा की गई जांच के दस्तावेज प्रस्तुत किए। मामले में आयोग ने अगले महीने सुनवाई करने का निर्णय लिया।
नैनीताल स्थित एक निजी स्कूल में छात्रा को निष्कासित करने के मामले में भी अध्यक्ष ने सख्त रुख अपनाया है। सात महीने से स्कूल की ओर से लगातार समय मांगने पर नाराज आयोग अध्यक्ष ने कड़ी कार्रवाई का निर्णय लिया। इस दौरान छात्रा के अभिभावक और स्कूल के वकील नेपाल सिंह भी मौजूद रहे।
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत प्रवेश न दिए जाने, स्कूल में बच्चों को धमकाने और मारपीट करने के मामले में हरिद्वार के शिक्षा अधिकारी का प्रतिनिधि उपस्थित हुआ। मामले की जांच में उस स्कूल में कई खामियां भी पाई गई हैं। मामले में ऊषा नेगी ने कड़ी चेतावनी देते हुए दस दिन के अंदर जांच रिपोर्ट आयोग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
भानियावाला स्थित निजी स्कूल के संबंध में अभिभावक संघ की ओर से आयोग को शिकायत मिली थी कि स्कूल एसी चार्ज और विकास शुल्क के नाम पर अवैध वसूली कर रहा है। इस संबंध में स्कूल ने 132 छात्रों के अभिभावकों को नोटिस जारी किया था। मामले में सुनवाई के शुक्रवार को स्कूल की प्रधानाचार्य को बुलाया गया था, लेकिन आयोग को ई-मेल से सूचना मिली की पांच जुलाई तक स्कूल बंद होने के कारण प्रबंधक और प्रधानाचार्य अपने पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हो सकते हैं। इस संबंध में आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने स्कूल को निर्देश दिए कि जब तक आयोग में निर्णय नहीं हो जाता तब तक 132 छात्रों से शुल्क वसूली को रद्द किया जाए। उन्होंने कहा कि इस दौरान किसी भी प्रकार का शुल्क वसूलना अवैध माना जाएगा।
वहीं टिहरी गढ़वाल में माता-पिता पर बालिका के उत्पीड़न के मामले में भी सुनवाई की गई। आयोग ने बालिका के माता-पिता को उत्पीड़न न करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान आयोग सदस्य शैलेंद्र शेखर करगेती, शारदा त्रिपाठी, सीमा डोरा और अनुसचिव कामिनी गुप्ता मौजूद रहे।