ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
गैरसैंण राजधानी और उत्तराखंड के सामाजिक सवालों पर केंद्रित धाद संस्था का नव वर्ष कैलेंडर रविवार को जारी किया गया। कैलेंडर के माध्यम से संस्था ने राज्य गठन के 17 वर्ष बाद भी राजधानी के मुद्दे पर बने असमंजस का मुद्दा उठाया है।
रविवार को राजपुर रोड स्थित रेस्त्रां में ‘हमने बहस खड़ी की थी, हमने लड़ी लड़ाई थी, हमने जुल्मों को झेला था, लाठी-गोली खायी थी, गैरसैण का सपना था, हमने बात चलाई थी’ गीत गाते कैलेंडर का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि राज्य की लड़ाई लडने वाले आंदोलनकारियों ने गैरसैण राजधानी का सपना देखा था, जो आज भी पूरा नहीं हो सका है। संस्थापक लोकेश नवानी ने कहा कि पहाड़ी राज्य की अवधारणा के मूल में गैरसैण राजधानी का सवाल भी था, जिसका जवाब आज तक नहीं मिल पाया है। कैलेंडर का पहला पेज गैरसैण राजधानी, दूसरा पेज राज्य की बोली-भाषा के संरक्षण व संवर्द्धन और तीसरा पेज राज्य की के प्राकृतिक सौंदर्य और गौरवशाली संस्कृति का परिचय कराता है। डा. जयंत नवानी, डीसी नौटियाल, सचिव तन्मय ममगाईं, बिरेश, जयदीप सकलानी, प्रो. एमसी सती, नवीन नौटियाल, अवनीश उनियाल, भारत नौटियाल, विजय जुयाल, बृजमोहन उनियाल, कल्पना बहुगुणा, रीता भंडारी, भानु बंगवाल समेत अन्य मौजूद रहे।