मायादेवी के मंदिर से अखाड़ा परिषद ने मांग की है कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाई जाए। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण यथाशीघ्र शुरू कर हिंदुओं की भावनाओं को साकार किया जाए। इस संबंध में अखाड़ा परिषद शीघ्र ही दिल्ली में प्रधानमंत्री से भेंटकर उन्हें ज्ञापन देगी।
अखाड़ा परिषद की ओर से केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी नई सरकार को शुभकामना संदेश भेजा गया। अखाड़ा परिषद की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि राम मंदिर प्रत्येक भारतवासी का सपना है। इस मंदिर के निर्माण में बहुत देर हो चुकी है। केंद्र सरकार मंदिर के रास्ते की सभी बाधाएं हटाकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करें। देश के हर हिंदू का सपना है कि राम मंदिर में जाकर पूजा अर्चना कर सके। राष्ट्रीय महामंत्री हरि गिरि ने कहा कि कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग है। कश्मीर को कोई भी भारत से जुदा नहीं कर सकता। कश्मीर के समुचित विकास के लिए अनुच्छेद 370 एवं 35ए हटाए जाना बहुत जरूरी है।
हरि गिरि ने कहा कि कश्मीरी पंडितों को शीघ्र कश्मीर ले जाकर वहां बसाया जाए। उन्होंने कहा कि कश्मीर की समस्या का निराकरण करने के लिए सामाजिक समरसता की जरूरत है। कश्मीर का आम नागरिक शांतिपूर्वक जीवन बिताना चाहता है। कुछ अलगाववादी शक्तियां पाकिस्तान के इशारों पर कश्मीर का माहौल बिगाड़ रही हैं। जब तक कश्मीर को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़ना बहुत जरूरी है।
उत्तर प्रदेश सरकार के इलाहाबाद में अर्द्धकुंभ के भव्य आयोजन के बाद उत्तराखंड सरकार पर हरिद्वार कुंभ को सफलता पूर्वक आयोजित करने का दबाव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह कह चुके हैं कि हरिद्वार महाकुंभ भी प्रयाग अर्द्धकुंभ से बढ़कर होगा।
इसके बाद त्रिवेंद्र सरकार ने सरकारी मशीनरी को भी महाकुंभ से संबंधित अवस्थापना विकास के लिए कमर कसने को कहा है। धर्मनगरी को यातायात के दबाव से बचाने और घाटों को सुविधा संपन्न बनाने की योजनाओं पर भी तेजी से काम शुरू हो गया है। महाकुंभ से पहले हरिद्वार-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया जाना है।
मुख्यमंत्री स्वयं महाकुंभ की तैयारियों की मानिटरिंग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी से महाकुंभ के लिए आर्थिक मदद मांगी है। केंद्र से मिले आश्वासन के बाद अब मुख्यमंत्री हरिद्वार के साधु संतों के बीच पहुंच रहे हैं।
सरकार के सामने बड़ी दिक्कत यह है कि प्रयाग में आयोजन के लिए विशाल क्षेत्र उपलब्ध है, जबकि हरिद्वार में सीमित स्थान के भीतर सभी सुविधाओं को उपलब्ध करवाना है। इसके लिए अखाड़ों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। मुख्यमंत्री इसी उद्देश्य से साधु संतों के बीच जाकर उनको तैयारियों से अवगत करवाने के साथ उनसे सुझाव लेंगे।