ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। विदेशों की तर्ज पर अब भारत में भी ‘वाइल्ड लाइफ टूरिज्म’ को बढ़ावा देने की तैयारी है। भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से तैयार किए गए नेशनल वाइल्ड लाइफ एक्शन प्लान (एनडब्ल्यूएपी) के तहत इसका मसौदा तैयार कर लिया गया है। इसे मसौदे को धरातल पर उतारा जाता है तो इससे न सिर्फ देश में वाइल्ड लाइफ टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों के मुताबिक ‘वाइल्ड लाइफ टूरिज्म’ को लेकर जो मसौदा तैयार किया है उसके तहत सभी चिड़ियाघरों, सफारी पार्कों के अलावा टाइगर रिजर्व, संरक्षित वन क्षेत्रों में इकोटूरिज्म की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। नीतियां बनाते समय इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि वन्यजीवों के प्राकृतिक पर्यावास व जंगलाें को नुकसान न पहुुंचे। स्थानीय युवाओं का भी एक कैडर तैयार किया जाएगा। यह युवा ‘नेचर गाइड’ के तौर पर सहयोग करेंगे। देशभर में ‘वाइल्ड लाइफ टूरिज्म’ को बढ़ावा दिया जा सकें, इसके लिए सभी टाइगर रिजर्व व संरक्षित वन क्षेत्रों के लिए अलग अलग पर्यटन योजनाएं बनाई जाएंगी। देश-विदेश के पर्यटक ‘वाइल्ड लाइफ टूरिज्म’ के प्रति आकर्षित हो सके इसके लिए जलीय इलाकों में ‘एंगलिंग’ (मछलियों को पकड़ने व उन्हें छोड़ने का एक खेल) को बढ़ावा देने के साथ वाटर स्पोर्ट्स को भी बढ़ावा दिया जाएगा। पर्यटन स्थलों पर कूड़ा कचरा प्रबंधन के साथ ही यात्रियों व वाहनों की संख्या को लेकर भी नीतियां बनाई जाएंगी।
वाइल्ड लाइफ टूरिज्म के लिए खाका तैयार कर लिया है। नेशनल वाइल्ड लाइफ एक्शन प्लान के तहत प्राथमिकता वाली योजनाएं तय कर ली हैं। इन योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, एनटीसीए, सेंट्रल जू अथारिटी, राज्यों के वन विभाग व पर्यटन विभागों के अधिकारी मिलकर काम करेंगे।
-डॉ. वीबी माथुर, निदेशक, भारतीय वन्यजीव संस्थान