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कमेटी बनने के बाद आगे नहीं बढ़ी जांच

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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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राजधानी में निजी एवं सरकारी अस्पतालों पर इलाज में लापरवाही के इक्का दुक्का नहीं बल्कि कई मामले सामने आ चुके हैं। इनमें छह मामले निजी अस्पतालों के हैं, लेकिन जांच के नाम पर जांच कमेटी के गठन से आगे बात नहीं बढ़ी।
नेशविला रोड दून निवासी महिला नेहा के इलाज में लापरवाही से मौत के मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी देहरादून ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर 15 दिन के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी करना तो दूर अभी जांच शुरू भी नहीं हो सकी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उनके पास कई जांचें हैं। इसके अलावा अन्य काम है। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना देनी होती है। कई बार सूचना आयोग में पेश होना होता है। जांच रिपोर्ट आएंगी तभी उस पर कार्रवाई होगी।
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यह है जांच टीम
मुख्य चिकित्साधिकारी ने 22 फरवरी 2018 को इलाज में लापरवाही पर महिला की मौत के मामले में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. दयाल शरण की अध्यक्षता में टीम गठित कर 15 दिन के भीतर जांच करके रिपोर्ट मांगी थी। टीम में गांधी शताब्दी आई हॉस्पिटल के डॉ. एनके मिश्रा, कोरोनेशन के डॉ. वीएस चौहान एवं इसी अस्पताल के डॉ. कुश ऐरन को शामिल किया गया था, लेकिन टीम गठित होने के बाद अब तक मामले में जांच शुरू नहीं हुई।
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ये है प्रकरण
नेशविला रोड निवासी नितेश महलोत्रा के मुताबिक वर्ष 2014 में उनकी पत्नी नेहा के अचानक पेट में दर्द हुआ। जिसे उपचार के लिए दून के एक निजी अस्पताल में ले गए थे। अस्पताल में परीक्षण के बाद चिकित्सक ने बताया कि उनकी पत्नी की किडनी खराब है, जिसे निकालना पड़ेगा। सहमति जताए जाने पर चिकित्सक ने किडनी निकाल दी, लेकिन ऑपरेशन के कुछ समय बाद टांके वाले स्थान पर गांठ बन गई। चिकित्सक ने कहा कि गांठ के लिए छोटा सा ऑपरेशन करना होगा। चिकित्सक ने ऑपरेशन कर गांठ वाले स्थान से जो मवाद निकाला उसे जांच के लिए दून की एक लैब में भेजा गया। लैब की जांच रिपोर्ट में अंतर्गर्भाशय अस्थानता लिखा था। चिकित्सक ने रिपोर्ट देखने के बाद बताया कि आगे इलाज की जरूरत नहीं है। जुलाई 2016 में मेरी पत्नी को फिर गांठ बन गई। इस पर उन्होंने पूर्व में कराई गई जांच की स्लाइड लैब से प्राप्त कर इसे जांच के लिए दिल्ली भेजा तो बताया किया कि पत्नी को कैंसर है। इसके बाद इलाज में लाखों खर्च करने के बावजूद पत्नी की मौत हो गई। महिला के ससुर रवि महरोत्रा के मुताबिक यदि कैंसर का शुरुआत में ही पता चल जाता हो शायद उनकी बहू बच जाती।

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निजी चिकित्सकों के खिलाफ इलाज में लापरवाही के करीब छह प्रकरण लंबित हैं। जांच रिपोर्ट आने पर ही प्रकरण में कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. वाईएस थपलियाल, मुख्य चिकित्साधिकारी
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