अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
मातृसदन के स्वामी शिवानंद सरस्वती ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से गंगा और यमुना को जीवित व्यक्ति का दर्जा देने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के बाद भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। कहा कि स्वयं को धर्म की ठेकेदार बताने वाली भाजपा की सरकारें हिंदू धर्म का नाश करने पर तुली हैं। भाजपा और उसके नेताओं को जवाब देना चाहिए कि जिस गंगा के नाम पर वे राजनीति कर रहे हैं, उसे जीवित व्यक्ति का दर्जा देने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाकर उन्होंने कौन सी गंगाभक्ति का परिचय दिया। उन्होंने भाजपा सरकारों पर लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाया।
शनिवार को मातृसदन में पत्रकार वार्ता में स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनारस में चुनाव लड़ने के दौरान कहा था कि वे यहां खुद नहीं आए बल्कि गंगा ने बुलाया है, लेकिन खुद उनकी केंद्र सरकार तथा राज्यों की भाजपा सरकारों ने गंगा का कोई भला नहीं किया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा गंगा को जीवित व्यक्ति का दर्जा देने का जो आदेश दिया गया था उसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। इससे सरकार की मंशा का पता चलता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार की नीयत को भांपकर मातृसदन ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी थी लेकिन सरकार की ओर से उनके साथ भी झूठ बोला गया कि वे इस पूरे आदेश के खिलाफ नहीं बल्कि केवल इस आदेश में मुख्य सचिव को जिम्मेदार नहीं बनाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। लेकिन सरकार पूरे आदेश को लेकर उच्चतम न्यायालय में गई। जो इनकी कथनी और करनी को स्पष्ट करता है। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि जिस तरह से शराब, खनन और अब गंगा को लेकर भी सरकार हाईकोर्ट के आदेशों को चुनौती दे रही है वह भाजपा के दावों की पोल खोल रहा है।
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि जब मातृसदन खनन के खिलाफ लड़ाई लड़ता है तब खनन माफिया को रोकने के लिए तो सरकार के पास पीएसी और पुलिस बल नहीं होता, लेकिन अब सरकार शराब के खिलाफ संघर्ष कर रही महिलाओं का आंदोलन रोकने को पीएसी तैनात की जा रही है। उन्होंने कहा कि गंगा के मुद्दे को लेकर मातृसदन का संघर्ष लगातार जारी रहेगा।