श्रीनगर (ब्यूरो)। मेडिकल कॉलेजों में अब सहायक प्रोफेसर बनने से पूर्व चिकित्सकों को एक साल की सीनियर रेजीडेंटशिप करनी होगी। पीजी (एमएस/एमडी) करने के बाद अब वे सीधे फैकल्टी का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। सीनियर रेजीडेंटशिप भी चिकित्सकों को 40 साल की उम्र से पहले करनी होगी। वहीं, पीजी करने के पश्चात प्रोफेसर पद के लिए 8 वर्ष और एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए 5 साल का अनुभव अनिवार्य कर दिया गया है।
एमसीआई (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) ने 5 जून को चिकित्सा संस्थानों में शिक्षकों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता नियमावली-1988 में संशोधन किया है जिसका गजट नोटिफिकेशन 8 जून को जारी हो गया है। इसके अनुसार अब पीजी करने के बाद चिकित्सक सीधे सहायक प्रोफेसर नहीं बन पाएंगे। उनको एक साल तक सीनियर रेजीडेंट पद का अनुभव लेना होगा। उसे 40 साल की उम्र से पहले यह अनुभव लेना होगा। पूर्व में पीजी करने के पश्चात चिकित्सक सहा. प्रो. पर नियुक्ति पा लेते थे। एसो. प्रो. के लिए 5 साल का शिक्षण अनुभव जरूरी हो गया है। ऐसे ही प्रोफेसर/अपर प्रोफेसर पद के लिए 8 साल का अनुभव अनिवार्य किया गया है। पहले एसो. प्रो. के लिए 4 साल और प्रो. के लिए 7 साल का अनुभव अनिवार्य था।
>> शोध पत्रों की शर्त में भी बदलाव
श्रीनगर। एमसीआई ने शोध पत्रिकाओं में शोध पत्र प्रकाशित करने की शर्त में भी परिवर्तन किया है। पूर्व में शोध पत्र का प्रथम और द्वितीय लेखक होने पर प्रमोशन हो जाता था। अब प्रथम और पत्राचार करने वाला लेखक होने पर ही प्रमोशन में मदद मिलेगी।
.......
एमसीआई की ओर से नियम परिवर्तन होने पर अब मेडिकल कॉलेजों में एसआर की नियुक्ति आसान हो जाएगी। प्रो. आशुतोष सयाना, निदेशक चिकित्सा शिक्षा उत्तराखंड