ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
आपातकालीन सेवा 108 के पूर्व कर्मचारियों ने मंगलवार से बेमियादी आंदोलन शुरू कर दिया। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें पूर्व की भांति वेतन देते हुए नई कंपनी में समायोजित किया जाए। इस धरने को पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट, कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना आदि कांग्रेस नेताओं का भी समर्थन मिला है।
बता दें, 108 का संचालन करने वाली कंपनी जीवीके के 717 कर्मचारियों को नोटिस दिया गया था। इसके बाद सभी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। बीते दिनों कुछ कर्मचारियों ने परेड ग्राउंड से सचिवालय कूच करने का भी प्रयास किया था, लेकिन अनुमति न मिलने से उन्होंने सांकेतिक धरना दिया। कर्मचारियों का आरोप है कि नई कंपनी में नए कर्मचारियों को ही तरजीह दी जा रही है। नई कंपनी पहले मिलने वाले वेतन के स्थान पर आधा वेतन देने की शर्त रख रही है। ऐसे में पांच दिन पूर्व सभी कर्मचारी अपने अपने घर चले गए और मंगलवार को कर्मचारी नेता विपिन जमलोकी के नेतृत्व में प्रदेशभर से पहुंचे कर्मचारी परेड ग्राउंड के पास धरनास्थल पर एकत्र हुए। कर्मचारियों ने नारेबाजी कर खुद को नई कंपनी में समायोजित करने की मांग दोहराई।
धरने को पूर्व कैबिनेट मंत्री और इंटक के अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट ने भी समर्थन दिया। हीरा सिंह बिष्ट ने सरकार पर कर्मचारियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया और उन्हें तत्काल प्रभाव से नई कंपनी में समायोजित करने की मांग की। धरनास्थल पर पहुंचे पूर्व मंत्री राजेंद्र भंडारी और कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि वे इस धरने में हर वक्त कर्मचारियों के साथ हैं। इसके अलावा उत्तराखंड क्रांति दल के नेताओं ने भी धरने का समर्थन किया।
---
कर्मचारियों के आरोप निराधार हैं। नई कंपनी में सभी मानकों को ध्यान में रखते हुए भर्तियां की गई हैं। इस पर विभाग की लगातार नजर है। अब तक नई कंपनी की एंबुलेंस में भी चार सुरक्षित प्रसव हो चुके हैं। जहां तक अभी तक के संचालन की बात है तो वह भी निर्बाध चल रहा है। वर्तमान में सभी 139 एंबुलेंस वाहन नए हैं। इसके साथ ही पूर्व की कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी 60 फीसदी है। शेष 40 फीसदी कर्मचारी स्थानीय हैं।
-डॉ रविंद्र थपलियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक उत्तराखंड