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रक्षा क्षेत्र के निजीकरण से लाखों कर्मचारी हो जाएंगे बेरोजगार

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रक्षा क्षेत्र के निजीकरण से लाखों कर्मचारी हो जाएंगे बेरोजगार
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
आजादी के बाद सेना को रक्षा उपकरण उपलब्ध कराने के लिए देश में 13 आर्डिनेंस फैक्ट्रियां स्थापित की गई थीं। ये फैक्ट्रियां सेना को वर्दी से लेकर टैंक और स्माल आर्म्स तक मुहैया कराती हैं। वर्तमान में देश में कुल 42 फैक्ट्रियां हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार 650 रक्षा उत्पादों में से 250 उपकरण निजी कंपनियों से खरीदने की तैयारी में है। इससे आर्डिनेंस फैक्ट्रियों के लाखों कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। ये बातें आल इंडिया डिफेंस इंप्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसएन पाठक ने सोमवार को आयुध निर्माणी एस्टेट रायपुर में रक्षा क्षेत्र की समस्याओं पर आयोजित सेमिनार में कहीं।
इंप्लाइज यूनियन-आर्डिनेंस फैक्ट्री रायपुर के तत्वावधान में आयोजित सेमिनार में एसएन पाठक ने कहा कि एक तरफ मेक इन इंडिया की मुहिम का जोर है। वहीं दूसरी ओर डिफेंस कॉरिडोर स्थापित कर निजी क्षेत्र की कंपनियों को शामिल करने का काम किया जा रहा है। इससे आर्डिनेंस फैक्ट्रियों के लाखों कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि फेडरेशन का प्रतिनिधिमंडल हाल ही में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मिला था। सरकार का तर्क है कि आर्डिनेंस फैक्ट्री के उपकरण महंगे होने के साथ ही गुणवत्ता में भी कमतर हैं। लिहाजा डिफेंस कॉरिडोर स्थापित कर निजी कंपनियों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है। एसएन पाठक ने कहा कि सरकार यह दलील बेबुनियाद है। सम्मेलन में अनिल उनियाल, अशोक शर्मा, रवि किशोर, संजय, कपिल चौधरी, नीरज शर्मा, अनिल कुमार, चेतन, संजीव मसाल, बीपी कोठारी आदि मौजूद रहे।
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कम लागत का हवाला बेतुका
ऑल इंडिया डिफेंस इंप्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव सी. श्रीकुमार के अनुसार अभी देश की ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों में कुल 650 तरह के रक्षा उपकरण सेना के लिए तैयार किए जाते हैं। इनमें अब कटौती कर 250 प्रोडक्ट तैयार करने का जिम्मा डिफेंस कॉरिडोर विकसित होने पर निजी कंपनियों को दिया जाएगा। इसमें निजी कंपनियां बॉक्स, बूट, यूनिफार्म, स्माल आर्म्स, राइफल जैसे प्रोडक्ट बनाएंगीं। ऐसे में खरबों रुपये खर्च कर स्थापित आर्डिनेंस फैक्ट्रियां बंदी की कगार पहुंच जाएंगी और कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय निजी कंपनियों से प्रोडक्ट तैयार कराने में 30 से 40 प्रतिशत कम लागत का हवाला दे रहा है जो बेतुका है।
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डिफेंस कॉरिडोर में उपेक्षा के खिलाफ होगी आर-पार की लड़ाई
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
डिफेंस कोरिडोर में उपेक्षा से आहत रक्षा क्षेत्र के कर्मचारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। इसके लिए 26 सितंबर को कोलकाता में कर्मचारियों की तीनों फेडरेशन की बैठक बुलाई गई है। बैठक में आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। यह जानकारी आयुध निर्माणी देहरादून में सोमवार को रक्षा क्षेत्र की समस्याओं पर आयोजित सम्मेलन में आल इंडिया डिफेंस इंप्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसएन पाठक ने दी।
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एसएन पाठक ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर अलीगढ़ से झांसी तक जो डिफेंस कॉरिडोर बनाया जा रहा है। इसके तहत देशभर में 60 हजार एकड़ में फैली ये फैक्ट्रियां निजी क्षेत्र की रक्षा कंपनियों को सौंप दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि अब सरकार के इस फैसले के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है। इसी क्रम में 26 सितंबर को कोलकाता में तीनों इंप्लाइज फेडरेशन का सम्मेलन होगा। सम्मेलन में कर्मचारी विरोधी नीति के खिलाफ आगामी रणनीति पर चर्चा की जाएगी। पाठक ने स्पष्ट किया कि इस समस्या के बाबत पूर्व में भी दिल्ली में व्यापक धरना प्रदर्शन किया जा चुका है, लेकिन इस बार आर-पार का संघर्ष होगा।
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