ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
भारत और थाईलैंड के बीच विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और मानचित्रण के क्षेत्र के सहयोग से दोनों देशों के बीच मानचित्र संबंधी तकनीकी ज्ञान को आदान-प्रदान किया जाना अच्छी पहल है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग जल्द ही यूएवी तकनीक के जरिए सर्वेक्षण शुरू करने जा रहा है।
ये बातें मुख्य अतिथि महासर्वेक्षक लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कुमार ने मंगलवार को हाथीबड़कला स्थित महा सर्वेक्षक कार्यालय के सभागार में शुरू हुई चार दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कहीं। उन्होंने कहा कि भारत-थाईलैंड के बीच भू-सर्वेक्षण व मानचित्र क्षेत्र में सूचनाओं का आदान-प्रदान अच्छी पहल है। दोनों देशों के बीच आगामी दो वर्षों में प्रस्तावित सहयोग के तमाम बिंदुओं पर चर्चा कर उन्हें धरातल पर उतारने की कोशिश की जाएगी। कार्यशाला के पहले दिन थाईलैंड से आए छह वैज्ञानिकों की टीम ने भारतीय विज्ञानियों के साथ भू-सर्वेक्षण के क्षेत्र में आए बदलाव पर विस्तार से चर्चा की। थाईलैंड प्रतिनिधि टातियां ने कहा कि भू-सर्वेक्षण के क्षेत्र में दोनों देशों ने आपसी सहयोग के जरिए अच्छी सफलता हासिल की है। थाईलैंड के विशेषज्ञों ने भारतीय सर्वेक्षण विभाग में 2016 में जो प्रशिक्षण लिया उससे देश को बहुत लाभ मिला है। इस अवसर पर नेशनल एटलस एंड थेमेटिक मैंपिंग आर्गनाइजेशन (नैटमो) की निदेशक ताप्ती बनर्जी ने कहा कि भारत और थाईलैंड के बीच सहयोग से बुद्ध सर्किट पर ‘इंडिया एशियन आर्कियोलॉजिलक एटलस फ्राम सेटेलाइट डाटा- कनेक्विटी ऑफ रीजनल कल्चर’ पर एक एटलस का प्रकाशन हो चुका है। भविष्य में थाईलैंड के सहयोग से और एटलस प्रकाशित होने की उम्मीद है। कार्यशाला संयोजक एसबी सिंह ने बताया कि मई-2013 में पीएम की यात्रा के दौरान थाईलैंड और भारत के बीच शहरी मानचित्रण में सहयोग को लेकर समझौते हुए थे। इसके बाद थाईलैंड के अधिकारियों ने भारतीय सर्वेक्षण विभाग में प्रशिक्षण प्राप्त किया था। तब से दोनों के बीच सूचनाओं व तकनीक के आदान-प्रदान को लेकर कार्यशालाएं आयोजित होती हैं।