ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
आज पापा होते तो जज बिटिया को देखकर कितना खुश होते। आठ महीने पहले पिता को खोने वाली शहर के प्रेमनगर की चेरब बत्रा ने उनके जाने के गम को ही अपनी कामयाबी का सहारा बना लिया। रिजल्ट आया तो पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा। चेरब ने दूसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की है। उन्होंने चार साल तक जज बनने के लिए तैयारी की। इस खास मौके पर पूरे परिवार ने स्व. अशोक बत्रा को सबसे ज्यादा मिस किया।
देहरादून के प्रेमनगर निवासी चेरब बत्रा ने श्री गुरु नानक पब्लिक गर्ल्स इंटर कालेज से 12वीं पास की। इसके बाद डीएवी पीजी कॉलेज से बीकॉम, एमकॉम और एलएलबी पास की। चेरब के दोस्तों ने उन्हें जज बनने के लिए प्रेरित किया तो चेरब तैयारी में जुट गई। पूरे परिवार का सहयोग मिला। पिता अशोक कुमार बत्रा ने कहा कि जिस दिन बिटिया जज बनेगी, वह मेरी जिंदगी का सबसे अहम दिन होगा। लेकिन अफसोस कि इन गौरवशाली लम्हों को देखने के लिए अशोक बत्रा आज इस दुनिया में नहीं है। यह बताते हुए चेरब की मां रानी बत्रा की आंखों में आंसू आ गए। चेरब ने अपने पिता की तस्वीर को चूमा और बोली, आज पापा होते तो यहां से लेकर बाहर चौराहे तक ढोल बजाकर मिठाईयां बांटते। चेरब ने एक बार पहले भी पीसीएस जे की परीक्षा दी थी लेकिन कामयाब नहीं हो पाई थी। इसके अलावा मध्य प्रदेश में इंटरव्यू दिया और असफल रही। राजस्थान में भी प्री परीक्षा पास करने के बाद मुख्य परीक्षा में बाहर हो गई थी। इतनी असफलताओं के बावजूद चेरब ने हिम्मत नहीं हारी। मेहनत से जुटी रही और कामयाब हो गई। चेरब का कहना है कि उनकी इस कामयाबी में उनकी मां, बड़ी बहन हेमा बत्रा और छोटे भाई आशीष बत्रा का विशेष सहयोग रहा। चेरब अब जज बनकर पीड़ितों को न्याय देने के लिए काम करना चाहती है।
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लक्ष्य बनाया और कामयाब हो गई
चेरब ने बताया कि उन्होंने शॉर्टकट के बजाए पढ़ाई का लंबा रास्ता अपनाया। पूरा कोर्स पढ़ा। उन्होंने लक्ष्य बनाया और कामयाबी मिली। चेरब ने इस दौरान बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाई। तैयारी के दौरान वह घर के काम भी करती थी। उन्होंने डीएवी कालेज के विधि शिक्षक राजेश दुबे से शिक्षा ग्रहण की।