ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
रिवर फ्रंट डेवलपमेंट (आरएफडी) प्रोजेक्ट को पब्लिक सेक्टर यूनिट (पीएसयू) के साथ ज्वाइंट वेंचर से विकसित करने के लिए सरकार ने सहमति दे दी है। प्रोजेक्ट में रिस्पना और बिंदाल नदियों के किनारे खाली भूमि का लैंड बैंक बनाकर विकास किया जाएगा। प्रोजेक्ट में 350 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसमें 70 फीसदी निवेश मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण करेगा।
आरएफडी प्रोजेक्ट सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। सरकार ने प्राधिकरण के इस प्रोजेक्ट को पब्लिक सेक्टर यूनिट के साथ ज्वाइंट वेंचर से पूरा करने पर सहमति दे दी है। प्रोजेक्ट में रिस्पना नदी के डेढ़ किमी क्षेत्र (धोरण ब्रिज से बालासुंदरी तक) और बिंदाल नदी में ढाई किमी (हरिद्वार बाईपास से चांचक ब्रिज तक) विकसित किया जाएगा। पूर्व में दोनों ही नदियों में पांच-पांच किमी का क्षेत्रफल विकसित किया जाना था।
प्रोजेक्ट के तहत रिस्पना और बिंदाल नदी किनारे की खाली भूमि को लैंड बैंक बनाया जाएगा। लैंड बैंक तैयार होने के बाद उसका सुंदरीकरण किया जाएगा। इसमें सड़क, पार्किंग, योगा पार्क, हैबिटेट सेंटर, साइकिल ट्रैक, जॉगिंग ट्रैक, फुटपाथ, चैक डैम, पुल तैयार होगा। बिंदाल क्षेत्र में मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल, आवासीय एवं व्यावसायिक प्रोजेक्ट का भी निर्माण किया जाएगा। ईडब्ल्यूएस के 410 फ्लैट बनाए जाएंगे। फ्लैट का आवंटन नदी क्षेत्र से विस्थापित होने वाले परिवारों को किया जाएगा। 350 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में 70 फीसदी निवेश प्राधिकरण करेगा। जबकि 30 फीसदी निवेश ज्वाइंट वेंचर पार्टनर को करना होगा। मालिकाना हक प्राधिकरण का ही रहेगा। पार्टनर 30 साल तक डेवलपमेंट क्षेत्र का शुल्क वसूलेगा।
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प्रोजेक्ट अनुबंधन के लिए दिखाई रुचि
प्राधिकरण कार्यालय में सोमवार को आरएफडी प्रोजेक्ट को लेकर बैठक हुई। इसमें केन्द्र और राज्य सरकार के पीएसयू एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। एजेंसियों ने प्राधिकरण के प्रस्ताव पर चर्चा की। कई एजेंसियों ने प्राधिकरण से प्रोजेक्ट के अनुबंध करने के लिए रुचि भी दिखाई।
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अकेले बिंदाल से विस्थापित होंगे 2230 परिवार
भविष्य में प्रोजेक्ट को रिस्पना पांच बिंदाल नदी क्षेत्र में किलोमीटर के दायरे तक बढ़ाया जाएगा। इसमें हजारों परिवार विस्थापित होंगे। बिंदाल नदी क्षेत्र में प्राधिकरण विस्थापित परिवारों का सर्वे कर चुका है। सर्वे के लिहाज से 2230 परिवार विस्थापित होंगे।