फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बुजुर्ग-दिव्यांग अब लिफ्ट से जाएंगे टपकेश्वर मंदिर

विज्ञापन
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला देहरादून
विज्ञापन

टपकेश्वर महादेव के दर्शन के लिए बुजुर्गों और दिव्यांगों को अब सीढ़ियां उतरने-चढ़ने से निजात मिल गई है। रविवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने टपकेश्वर मंदिर में 1.55 लाख की लागत से बनी लिफ्ट का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाशिवरात्रि से पहले लिफ्ट का उद्घाटन कर दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालु टपकेश्वर मंदिर पहुंच महादेव के दर्शन कर सकें। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में 14 करोड़ की लागत के 17 नए कार्यों का शिलान्यास भी किया।
टपकेश्वर मंदिर में बुजुर्गों और दिव्यागों को सीढ़ी से आने-जाने में परेशानी होती थी। लिहाजा एमडीडीए की ओर से यहां लिफ्ट का निर्माण किया गया। नोडल एजेंसी यूपी निर्माण निगम ने डेढ़ साल में लिफ्ट का काम पूरा किया। लिफ्ट के उद्घाटन के बाद सीएम त्रिवेंद्र ने कहा कि चार फरवरी को दुनियाभर में कैंसर डे मनाते हैं। एक ही साल में हमारे देश में कैंसर के मरीजों की संख्या 14 लाख से 25 लाख हो गई है। कैंसर अधिकतर महिलाओं को होता है। उन्होंने कहा कि ब्रेस्ट कैंसर भी महिलाओं में तेजी से फैल रहा है। इस बीमारी छिपाने की जगह समय से इलाज जरूरी है। मुख्यमंत्री ने केंद्र की योजनाओं की भी जानकारी दी।
विज्ञापन

इस दौरान विधायक गणेश जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से इस कार्यक्रम में कैंट के अस्पताल के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन दी जानी थी, लेकिन दिल्ली से डिलीवरी में देरी के चलते मशीन बाद में दी जाएगी। इससे कैंट के मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए शहर नहीं जाना पड़ेगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने टपकेश्वर में घाट के चौड़ीकरण कार्य का भी शुभारंभ किया। कैंट सीईओ जाकिर हुसैन, महंत किशन गिरी, भरत गिरी महाराज, नीलम सहगल, विनय गोयल, विपिन जोशी, मनमोहन जायसवाल, पद्म सिंह थापा थे।
--
1.55 लाख से बनी 15 मीटर लिफ्ट
टपकेश्वर परिसर में दूधेश्वर मंदिर से नीचे तक कुल 15 मीटर, यानी एक फ्लोर की लिफ्ट बनी है। इसकी लागत 1.55 लाख है। लिफ्ट को बनाने में निर्माण निगम को करीब डेढ़ साल लगे। इसमें डेक्सपन केमिकल का इस्तेमाल किया गया है। दरअसल, केमिकल डालकर पहाड़ गलाने के चलते इस तकनीक में अधिक समय लगा। निर्माण निगम के सहायक अभियंता विजय कुमार ने बताया कि टपकेश्वर परिसर की पहाड़ियों का सौंदर्य न बिगड़े, इसलिए पहाड़ियों में छेद कर केमिकल डालकर इसे गलाया गया। इस तकनीक में सामान्य से छह माह अधिक लग गए। साथ ही यह प्रक्रिया सामान्य से दस प्रतिशत महंगी भी पड़ी। लेकिन इससे पहाड़ियों का ढांचा नहीं बिगड़ और खूबसूरती के बीच ही लिफ्ट बन गई। लिफ्ट के दरवाजे नीचे और ऊपर विपरीत दिशा में खुलते हैं। लिहाजा, फिलहाल तीन महीने तक लिफ्ट में एक ऑपरेटर तैनात रहेगा, जो लोगों को लाने और ले जाने में मदद करेगा।
--
मैं तो लिफ्ट से ही जाऊंगी...
लिफ्ट शुभारंभ के मौके पर बुजुर्ग शांति देवी वहीं खड़ी रहीं और बोलीं कि मैं तो लिफ्ट से ही ऊपर जाऊंगी। उन्होंने कहा कि मैं लंबे समय से टपकेश्वर मंदिर में सफाई करने आती हूं। अब सीढ़ी चढ़ने की हिम्मत नहीं रही। यहां लिफ्ट लगाकर बहुत अच्छा काम किया है। कम से कम बुजुर्गों और दिव्यांगों को अब मंदिर में दर्शन के लिए सोचना नहीं पड़ेगा।
--
ग्रहण वाले दिन होना था शुभारंभ
पहले लिफ्ट का शुभारंभ कार्यक्रम 31 जनवरी को होना था, लेकिन उस दिन चंद्रग्रहण होने की वजह से इसे आगे बढ़ाया गया। ग्रहण के दिन शुभ कार्य निषेेध माने जाते हैं। ऐसे में यह कार्य चार फरवरी को किया गया।
विज्ञापन

--
सड़क का शिलान्यास
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने गढ़ी कैंट में 96 लाख की लागत से दो किमी सड़क का शिलान्यास किया। साथ ही परमवीर चक्र विजेता धन सिंह थापा के नाम पर गढ़ी कैंट में द्वार बनाने की घोषणा भी की।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें