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जानवर के काटने पर न करें घरेलू उपचार

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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून।
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श्रीदेव सुमन सुभारती मेडिकल कालेज में शनिवार को रैबीज पर सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में मुख्य अतिथि पूर्व स्वास्थ्य महानिदेशक डीएस रावत ने कहा कि देश में हर साल कुत्ते या अन्य जंगली जानवर के काटने के करीब सत्रह लाख मामले हर सामने आते हैं, जिनमें से करीब बीस हजार लोगों की मौत रैबीज का टीका न लगवाने की वजह से हो जाती है। लोग घरेलू उपचार और टोने टोटकों के चक्कर में पड़ कर मरीज को रैबीज का टीका नहीं लगवाते। लोग अक्सर घाव पर लाल मिर्च बांधकर पट्टी बांध देते हैं, जिससे मरीज की जान पर बन आती है। उत्तराखंड और अन्य पहाड़ी इलाकों में ये मामले अन्य क्षेत्र के मुकाबले ज्यादा होते हैं।
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प्राचार्य डा. राजेश मिश्रा ने कहा कि कुत्ते या जंगली जानवर द्वारा आदमी को काटना आम बात है। जब इसका इलाज नहीं था तो घरेलू उपचार व झाड़ फूं क की बात समझ में आती थी, लेकिन अब इसका इलाज संभव है, फि र घरेलू उपचार और टोने टोटकों की कोई जरूरत नहीं है लोगों को इस मामले में जागरूक करने की आवश्यकता है। इससे पूर्व मुख्य अतिथि पूर्व महानिदेशक डा. डीएस रावत, पीसीआरआई के अध्यक्ष डा. सुमित पोददार, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. जीवन आशा, आयोजन समिति के अध्यक्ष डा. जयराज सिंह हंसपाल व रूपा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में रासबिहरी बोस विवि के संस्थापक डा. अतुल कृष्णा, डा. देवव्रत राय, डा. नितिन बंसल, डा. रीता मणि, डा. सुमित पोददार, डा. बीआर हरीश, डा. अदिति शर्मा, डा. रविश एचएस, डा. डीएच अश्वथ नारायण ने अपने विचार रखे। सेमिनार के आयोजन में आयोजन समिति सचिव डा. रूपा जेएच, डा. अनिल मोंगिया, डा. शैलेन्द्र चौधरी, डा. निधि उनियाल, डा. मशरुफ, डा. दीनदयाल, अविनाश श्रीवास्तव, रविन्द्र प्रताप, लोकेश त्यागी विकेन्द्र कठैत आदि मौजूद रहे।
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