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नौनिहालों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़

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नौनिहालों की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। परिवहन विभाग की ओर से मंगलवार से स्कूली बसों की जांच को लेकर शुरू किए विशेष अभियान में जो खामियां सामने आईं हैं, उसने परिवहन विभाग के अफसरों को भी पशोपेश में डाल दिया है। जांच अभियान के दौरान कई बसों व वैन में सुरक्षा जाली व ग्रिल नहीं मिली। बस में अग्निशमन उपकरण भी नहीं मिले।
जांच अभियान के दौरान बसोें व वैन में प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड बॉक्स के नाम पर भी कुछ नहीं मिला। सीबीएसई व परिवहन विभाग के प्रावधानों के तहत स्कूली बसों व वैन में बच्चों का बैग रखने के लिए विधिवत जगह होनी चाहिए, लेकिन एक भी बस में ऐसी व्यवस्था नहीं मिली। छोटे बच्चे बसों व वैन में आसानी से चढ़ सकें, इसके लिए बसों में लो फ्लोर की सुविधा का प्रावधान है लेकिन यह सुविधा भी नहीं पाई गई। चालकों व परिचालकों को स्कूली बसों में वर्दी में होना चाहिए लेकिन एकाध को छोड़कर कोई भी वर्दी में नहीं मिला। चालकों-परिचालकोें के पास बच्चों की सूची नहीं पाई गई।
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एआरटीओ अरविंद पांडे ने बताया कि ऐसी सभी बसों को सीज कर दिया गया है। इनके संचालन की अनुमति अब तभी दी जाएगी जबकि निर्धारित प्रावधानों को पूरा कर लिया जाएगा।
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राज्य में सिर्फ स्कूली बसों के 2267 चालकों, 1416 परिचालकोें का सत्यापन
जिन स्कूली बसों में अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजकर सुरक्षित मान रहे हैं उसमें से ज्यादातर चालकों-परिचालकों का कोई रिकार्ड पुलिस के पास नहीं है। यातायात निदेशालय की ओर से बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक पूरे राज्य में महज 2267 चालकों, 1416 परिचालकोें का भौतिक सत्यापन कराया गया है। सत्यापन के मामले में हरिद्वार की स्थिति सबसे अच्छी है, जहां सबसे अधिक 490 चालक व 377 परिचालकों का सत्यापन कराया गया है। जबकि नैनीताल व टिहरी गढ़वाल में एक भी परिचालक का सत्यापन नहीं है।
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