ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
देश को तो जस्टिस पीसी घोष के रूप में पहला लोकपाल मिलने वाला है, लेकिन उत्तराखंड में लोकायुक्त के हालात बेहद बुरे हैं। यहां छह साल से लोकायुक्त की कुर्सी खाली हुई है। प्रदेश में लोकायुक्त एक्ट को लेकर स्थित भी स्पष्ट नहीं है। इससे 1507 से अधिक भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है।
उत्तराखंड गठन के बाद यहां यूपी उप लोकायुक्त अधिनियम 1975 लागू हो गया। इसके तहत वर्ष 2002 में जस्टिस एसएचए रजा ने कुर्सी संभाली। वे वर्ष 2008 तक इस पद पर रहे। इसके बाद एमएम घिल्ड़ियाल ने लोकायुक्त की कुर्सी संभाली, लेकिन वह कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। पहले मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी लोकायुक्त अधिनियम लेकर आए। यह अधिनियम लागू होने से पहले ही उनकी कुर्सी चली गई। इस अधिनियम के नियमों के चलते एमएम घिल्ड़ियाल को वर्ष 2013 में कुर्सी छोड़कर जाना पड़ा। फिर मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय बहुगुणा नया लोकायुक्त अधिनियम लेकर आए। उन्होंने एलान किया कि 180 दिन के भीतर एक्ट लागू हो जाएगा, लेकिन वे भी कामयाब नहीं हो पाए। इसके बाद हरीश रावत मुख्यमंत्री बने। उन्होंने घोषणा की थी कि लोकायुक्त की नियुक्ति के साथ ही नया लोकायुक्त अधिनियम लागू हो जाएगा, लेकिन नियुक्ति ही नहीं हो पाई। इसके बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार में लोकायुक्त अधिनियम पर काम शुरू हुआ, लेकिन विधानसभा की चयन समिति से आगे नहीं बढ़ पाया है। हालात यह हैं कि पटेलनगर स्थित लोकायुक्त कार्यालय में काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को ही नहीं पता कि वह किस एक्ट के तहत काम करें। फिलहाल उत्तर प्रदेश उप लोकायुक्त एक्ट के तहत ही काम कर रहे हैं, लेकिन लोकायुक्त की कुर्सी खाली होने की वजह से किसी भी शिकायत पर सुनवाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में शिकायतों का ढेर बढ़ गया है। बीते एक वर्ष में जहां 55 शिकायतें आई हैं, वहीं छह साल में 1507 से अधिक शिकायतें, सुनवाई का इंतजार कर रही हैं।
जर्जर हो रहा है कार्यालय
इंडस्ट्रियल एरिया पटेलनगर लालपुल के पास स्थित लोकायुक्त कार्यालय खुद में ही बहुत कुछ कहता है। कार्यालय में एक हाल सहित करीब 18 कमरे हैं। इनमें से पांच कमरे ही खुलते हैं। बाकी में ताले लटके हैं। कई कमरे तो जर्जर हो गए हैं। बंद पड़े पड़े कमरों में धूल जम चुकी है और फ र्नीचर और वुडन फ र्श खराब हो चुका है।
फरवरी 2014 को चस्पा हुआ था आखिरी नोटिस
आयोग के कार्यालय में 5 फरवरी 2014 को आखिरी नोटिस चस्पा किया गया था। जिसमें साफ लिखा गया है कि दिसंबर 2013 के बाद इस कार्यालय में लोकायुक्त का पद खत्म कर दिया जाता है। इस नोटिस के बाद वहां पर आज तक कोई नोटिस चस्पा नहीं किया गया है।
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अभी कार्यालय में लोकायुक्त नियुक्त नहीं हैं। इस वजह से केवल प्रशासनिक काम चल रहे हैं। भ्रष्टाचार पर कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है। जैसे लोकायुक्त की नियुक्ति होगी, उसी के बाद शिकायतों पर कार्रवाई हो पाएगी।
-हेम कांडपाल, निदेशक, लोकायुक्त कार्यालय