ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। विद्युत संशोधन बिल- 2018 और नेशनल टैरिफ पॉलिसी के जनविरोधी प्रावधानों के विरोध में उत्तराखंड विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की अगुवाई में ऊर्जा विभाग के तीनों निगमों का मंगलवार से दो दिवसीय कार्यबहिष्कार शुरू हो गया है। पहले दिन अभियंताओं और कर्मचारियों ने यूपीसीएल मुख्यालय में धरना प्रदर्शन कर मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रबंध निदेशक को सौंपा।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि विद्युत संशोधन बिल 2018 लागू करने से उपभोक्ताओं को जहां महंगी बिजली दरों का सामना करना पड़ेगा वहीं अभियंताओं, कर्मचारियों के हितों पर भी कुठाराघात होगा। जिस नेशनल टैरिफ पॉलिसी को केंद्र लागू करने जा रहा है वह पूरी तरह जनविरोधी है। वक्ताओं ने ऊर्जा विभाग के तीनों निगमों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए 9 साल, 14 साल और 18 साल की सेवा के उपरांत समयबद्ध वेतनमान देने की भी मांग उठाई। साथ ही यूपीसीएल, यूजेवीएनएल व पिटकुल में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की भी मांग की। इस दौरान उत्तराखंड विद्युत अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के संयोजक इंसारूलहक, उत्तराखंड पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष युद्धवीर सिंह तोमर, उत्तराखंड पावर जूनियर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जीएन कोटियाल, विद्युत डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज कुमार सैनी, बिजली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष एमएन नौटियाल, ऊर्जा कामगार संगठन के अध्यक्ष राकेश शर्मा, पावर लेखा संघ के अध्यक्ष डीसी ध्यानी, विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विनोद कवि, हाइड्रो इलेक्ट्रिक इंप्लाइय यूनियन के अध्यक्ष केहर सिंह, भगवती प्रसाद आदि मौजूद रहे।