उत्तरकाशी। धराली में गंगोत्री हाईवे को पार कर गंगा भागीरथी में मिलने वाली खीर गंगा के उफान में बुग्यालों से आ रही काली मिट्टी को देखकर स्थानीय लोग किसी अनहोनी से आशंकित हैं। नदी में उफान के कारण तटवर्ती हिस्सों में सेब के बागीचों के अलावा पुरातत्व महत्व के कल्प केदार मंदिर की एक दीवार ढह गई है। बारिश का सिलसिला लंबा खिंचा तो यहां क्षति का दायरा बढ़ने की आशंका है।
लगातार हो रही बारिश के कारण श्रीकंठ हिमशिखर के नीचे से आने वाली खीर गंगा बेकाबू होने लगी है। पुराने धराली गांव के सामने ज्ञानेंद्र के सेब के बागीचे में धंसाव होने से सेब से लदे पेड़ तिरछे होने लगे हैं। स्थानीय निवासी महेश पंवार, उमेश, जयभगवान, संजय पंवार आदि स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव से करीब चार किमी ऊपर झिंडा बुग्याल में बड़े पैमाने पर भू धंसाव हो रहा है। यहीं से काली मिट्टी खीर गंगा में पहुंच रही है। यदि यहां ज्यादा कटाव हुआ तो धराली गांव के साथ ही वर्ष 2013 की तरह गंगोत्री हाईवे एवं धराली बाजार को भारी नुकसान पहुंच सकता है। गांव के पैदल पुल के पास भारी मलबा जमा होने से यह किसी भी समय बह सकता है।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2013 की आपदा में धराली के पास गंगोत्री हाईवे पर बनी पुलिया की निकासी खीर गंगा में बहकर आए पेड़ों से बंद होने पर मलबा बाजार में घुस गया था। यहां हाईवे पर खड़ी करीब तीन दर्जन गाड़ियां मलबे में दब गई थीं और करीब डेढ़ दर्जन होटलों में मलबा भरने से भारी नुकसान हुआ था। आपदा के पांच साल बाद भी सरकार ने यहां गंगोत्री हाईवे पर बनी पुलिया की ऊंचाई बढ़ाकर यहां से पानी की सुरक्षित निकासी के इंतजाम नहीं किए हैं। अब खीर गंगा के ऊपरी हिस्से में हो रहे भूधंसाव के चलते क्षेत्र के लोग एक और तबाही के प्रति आशंकित हैं।