ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
14 अक्तूबर 2015 को जारी आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक शुल्क संबंधी शासनादेश को हाईकोर्ट के रद्द करने के आदेश के बाद छात्रों के लिए फिलहाल पुरानी फीस पर ही दाखिले की राह खुल गई है। जल्द ही उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की ओर से प्रदेश में बीएएमएस और बीएचएमएस दाखिलों के लिए काउंसिलिंग कराई जाएगी। काउंसिलिंग से ठीक पहले हाईकोर्ट के इस फैसले से छात्रों को बड़ी राहत मिली है।
शासन ने वर्ष 2015 में जो शासनादेश जारी किया था, उसके तहत बीएएमएस का शुल्क 80 हजार रुपये सालाना से बढ़ाकर 2.15 लाख रुपये और बीएचएमएस का शुल्क 73,600 रुपये से बढ़ाकर 1.10 लाख रुपये कर दिया गया था। इसके खिलाफ छात्रों ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। आखिरकार, सोमवार को हाईकोर्ट ने शासनादेश को रद्द कर दिया। इसके साथ ही छात्रों के लिए नए सत्र में कम फीस पर दाखिले की राह भी खुल गई है।
हालांकि, छात्रों को यह राहत तब तक ही मिलेगी, जब तक कि प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति नया शुल्क तय नहीं करती है। चूंकि यह लंबी प्रक्रिया है, इसलिए फिलहाल यह माना जा रहा है कि जल्द होने जा रही बीएएमएस और बीएचएमएस काउंसिलिंग के बाद आवंटित सीटों पर पुराने शुल्क से ही दाखिले होंगे।