ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
उत्तराखंड की लोक संस्कृति को युवाओं तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। यह बात सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री एवं नैनीताल सांसद भगत सिंह कोश्यारी की पुस्तक ‘उत्तराखंड का जन इतिहास : लोक संस्कृति एवं समाज’ के विमोचन के मौके पर कही।
सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि अपनी संस्कृति और पहचान को संजोकर रखना जरूरी है। इससे आने वाली पीढ़ी को परंपरा और इतिहास को जानने का मौका मिलेगा। सीएम रावत ने कहा कि प्रदेश में आने वाले दिनों में पानी की समस्या भयानक रूप लेने वाली है। लिहाजा हमें अपने जल स्रोतों का संरक्षण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि दून के पुस्तकालय पर भी सरकार काम कर रही है। पुस्तक के संपादक डॉ. विजय बहुगुणा ने कहा कि पुस्तक भगत सिंह कोश्यारी के अनुभवों को समर्पित है। पुस्तक प्रदेश की कहानी बयान करती है।
इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि इतिहास और संस्कृति को बिना भूले हमें भविष्य की ओर बढ़ना चाहिए। अगर हम इतिहास और संस्कृति को भूल गए तो विकास की रफ्तार भी थम जाएगी। पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने कहा कि भाषा में बदलाव और गुम होती परंपरा की समस्या उत्तराखंड की नहीं बल्कि पूरे देश की है। इस मौके पर उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत, दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के निदेशक डॉ. बीके जोशी, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, महानगर अध्यक्ष विनय गोयल, रेनू बिष्ट प्रवीन कुमार भट्ट, अंकित रमोला आदि मौजूद रहे।
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हरेला के दिन होगा पौधरोपण
रिस्पना को पुनर्जीवित करने के लिए हरेला के दिन रिस्पना के किनारे पौधरोपण किया जाएगा। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि अक्तूबर में हरेला पर्व के पहले दिन अल्मोड़ा में पौधरोपण किया जाएगा। उसके बाद रविवार को रिस्पना में पौधरोपण किया जाएगा। सीएम ने कहा कि पांच साल में रिस्पना में ढाई लाख पौधों को जीवित रखना है, जिससे देश और विदेश के वन शोधकर्ता यहां आएं और रिस्पना दुनिया का सबसे खूबसूरत पर्यटक स्थल बने।