ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
अगस्त्यमुनि समेत रुद्रप्रयाग के कई अन्य स्थानों पर भड़की हिंसा और आगजनी के मामले में पुलिस अधिकारियों का ढुलमुल रवैया सामने आया है। पहाड़ के कई इलाकों में हिंसक घटना के बावजूद डीआईजी समेत पुलिस के किसी भी आलाधिकारी ने मौके पर जाना तक उचित नहीं समझा। पुलिस अधिकारी दून में बैठकर हालात पर नजर रखने का दावा करते रहे।
शुक्रवार को जिस वक्त रुद्रप्रयाग जिले में हिंसा भड़की, वहां के एसपी प्रह्लाद मीणा छुट्टी पर अपने घर राजस्थान थे। हालात बेकाबू हुए तो एसपी चमोली तृप्ति भट्ट ने नियंत्रण के प्रयास किए। लेकिन स्थिति उनके नियंत्रण से पूरी तरह बाहर हो चुकी थी। पुलिस अधिकारी भी मान रहे हैं कि इनपुट के बावजूद समय पर पुलिस ने निषेधात्मक कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते हिंसा भड़की। आनन-फानन में एसपी मीणा दून और फिर रुद्रप्रयाग पहुंचे। इस दौरान पुलिस के तमाम आलाधिकारी हालात पर नजर रखने का दावा करते रहे।
शनिवार सुबह डीआईजी गढ़वाल ने दून स्थित अपने कार्यालय में पत्रकार वार्ता कर तीन अलग-अलग मामलों में 10 गिरफ्तारियों की जानकारी देकर अपनी पीठ थपथपाई। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर गलत मैसेज फैलाने के मामले में दो, युवती से छेड़छाड़ के मामले में तीन और आगजनी व हिंसा के मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
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कोट
हम हालातों पर नजर बनाए हुए हैं। जरूरत पड़ी तो मैं खुद भी मौके पर जाऊंगा। हमारे पास जुलूस निकाले जाने की जानकारी थी लेकिन जुलूस उग्र हो जाएगा, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।
पुष्पक ज्योति, डीआईजी, गढ़वाल