ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
एक ओर निजी सीबीएसई स्कूल केवल एनसीईआरटी की किताबों का विरोध कर रहे हैं तो दूसरी ओर देशभर में ऐसे भी स्कूल हैं, जहां केवल एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई जाती हैं। हम बात कर रहे हैं केंद्रीय विद्यालयों की। यहां प्राइवेट किताबों को खरीदने या इस्तेमाल करने का कोई नियम नहीं है। केवल एनसीईआरटी किताबों से बच्चों को तैयारी कराई जाती है। एक अच्छी बात यह है कि शिक्षक अपने स्तर से छात्रों को स्टडी मैटेरियल तैयार कराकर देते हैं।
केंद्रीय विद्यालयों में प्राइवेट पुस्तकें बैन हैं। यहां केवल एनसीईआरटी की किताबें ही बच्चों को पढ़ाई जाती हैं। केंद्रीय विद्यालय 1 के प्रिंसिपल इंद्रजीत सिंह ने बताया कि सभी केंद्रीय विद्यालयों में वर्षों से केवल एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि यह अभिभावकों के लिए भी काफी सस्ती पड़ती हैं। इन पुस्तकों के अलावा किसी भी केवि में प्राइवेट पब्लिशर की किताबें इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है। छात्रों की तैयारी और बेहतर कराने के लिए केवि के शिक्षक अपनी-अपनी क्लास में अपने हाथ से स्टडी मैटेरियल तैयार कर छात्रों को देते हैं। इन किताबों से पढ़कर ही देशभर में केंद्रीय विद्यालयों के छात्र न केवल बोर्ड परीक्षाओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफलता की इबारत लिखते आ रहे हैं। दूसरी ओर, प्रदेशभर के निजी स्कूल लगातार केवल एनसीईआरटी किताबें पढ़ाने का विरोध कर रहे हैं। इस विरोध में ही उन्होंने अनिश्चितकाल के लिए स्कूल बंद करने का ऐलान किया हुआ है।