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उतराखंड के हजारों छात्रों के हाथ से निकला नीट

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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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सीबीएसई के एक नियम के चलते उत्तराखंड के हजारों छात्रों के हाथ से नीट परीक्षा निकल गई है। सीबीएसई नीट में इस साल नियम आया है कि एनआईओएस या प्राइवेट छात्रों को नीट में शामिल होने का मौका नहीं मिलेगा। इस नियम के दायरे में तमाम ऐसे भी छात्र-छात्राएं आ गए हैं, जो कई साल से परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें पहले से इस नियम की कोई जानकारी भी नहीं दी गई थी।
राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) की ओर से फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी में 12वीं करने का मौका दिया जाता है। हर साल उत्तराखंड से करीब तीन हजार छात्र एनआईओएस से 12वीं करते हैं। इसके अलावा सीबीएसई या आईएससी बोर्ड के वह छात्र भी एनआईओएस से परीक्षा देते हैं, जिनके अंक कम रह जाते हैं। ऐसे छात्रों के लिए एनआईओएस ऑन डिमांड परीक्षा कराता है। इस परीक्षा में शामिल होने के बाद छात्रों को सालभर का इंतजार नहीं करना पड़ता। ऑन डिमांड परीक्षा में भी हर साल कई बोर्ड के करीब एक हजार छात्र शामिल होते हैं। ऐसे सभी छात्रों को इस बार मेडिकल दाखिलों की कॉमन राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में शामिल होने से मना कर दिया गया है। एनआईओएस से 12वीं करने वाले अनिरुद्ध का कहना है कि वह एक साल ड्रॉप कर नीट की तैयारी कर रहे थे लेकिन अब अचानक आए नियम ने उनके लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। परीक्षा की तैयारी कर रहे विक्रांत नेगी का कहना है कि एनआईओएस जब केंद्र सरकार का बोर्ड है तो उनके साथ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है? वह नीट की तैयारी में जुटे थे लेकिन उनका डॉक्टर बनने का सपना चकनाचूर हो गया है। इसी प्रकार, छात्रा देवांशी का कहना है कि उनके आईएससी बोर्ड में दो सब्जेक्ट में कम मार्क्स रह गए थे। इसलिए एनआईओएस से एग्जाम देकर अच्छे अंक हासिल किए हैं। उन्हें क्या पता था कि पूरी मेहनत की बेकार चली जाएगी। परीक्षा विशेषज्ञ विपिन बलूनी का कहना है कि छात्रों को इस साल राहत दी जानी चाहिए थी।
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स्वास्थ्य मंत्रालय का यह फैसला गलत है। बच्चे इतने दिनों से तैयारी कर रहे हैं। मंत्रालय ने अचानक एनआईओएस के छात्रों पर रोक लगा दी। सरकार को अपने इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए। इससे छात्रों का नुकसान होगा। उनका भविष्य खराब होने का कौन जिम्मेदार होगा? - डीके मिश्रा, निदेशक, अविरल क्लासेज
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