राज्यमंत्री ने किया गंगा और हिंदुओं का अपमान
-- केंद्रीय राज्यमंत्री के बयान पर गुस्साया भारत साधु समाज
-- ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने की देश की जनता से माफी मांगने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण राज्यमंत्री डा. सत्यपाल सिंह के हरिद्वार में दिए गए बयान पर भारत साधु समाज गुस्से में है। समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने मंत्री के गंगा में अस्थियां प्रवाहित नहीं करने संबंधी बयान की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि इससे मोक्षदायिनी गंगा और हिंदू समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने मंत्री से बयान को वापस लेने और देश की जनता से माफी मांगने की मांग की है।
बुधवार को तीर्थनगरी स्थित जयराम आश्रम में आश्रमाध्यक्ष एवं भारत साधु समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी मीडिया से मुखातिब हुए। इस दौरान उन्होंने मंत्री डा. सत्यपाल पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का ज्ञान नहीं है। यही वजह है कि वह इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं। कहा कि भाजपा ने धर्म के नाम पर देश की सत्ता हासिल की है, लेकिन उनका ही मंत्री दोमुंही बातें कर रहे हैं।
कहा कि आदिकाल से पूर्वजों की मुक्ति के लिए गंगा में अस्थियां प्रवाहित की जाती रही हैं। ब्रह्मचारी ने कहा कि साधु और संत समाज भी गंगा की अविरलता और प्रदूषण मुक्ति के पक्षधर है, लेकिन मोक्षदायिनी में अस्थियां प्रवाहित करना आस्था से जुड़ा मामला है, जोकि सदियों से निरंतर चला आ रहा है। कहा कि मंत्री के बयान को लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से भी शिकायत की जाएगी।
मुख्यमंत्री पर भी साधा निशाना
ऋषिकेश। जयराम आश्रमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी आड़े हाथों लिया। कहा कि सीएम इसे अंधविश्वास बताते हैं, जोकि सरासर गलत है। कहा कि भविष्य में इस तरह की बयानबाजी दोहराई गई, तो साधु और संत समाज इसका हर स्तर पर विरोध करेगा।
भू-समाधि के लिए भूमि की मांग दोहराई
ऋषिकेश। जयराम आश्रमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने राज्य सरकार से संतों की भू-समाधि के लिए हरिद्वार में 50 और ऋषिकेश में 25 एकड़ भूमि देने की मांग को दोहराया है। बताया कि भूमि के लिए आखड़ा परिषद प्रस्ताव पारित कर चुकी है। लेकिन सरकार अभी तक इस दिशा में कोई भी पहल नहीं कर पाई है। उन्होंने भू-समाधि के लिए संतों को शीघ्र भूमि उपलब्ध कराने की मांग की।