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Dehradun News: आपातकालीन सेवा में लाइफ लाइन बनी 108 एंबुलेंस सेवा

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-पर्वतीय क्षेत्रों में कॉल आने पर 23.09 मिनट में एंबुलेंस पहुंचने का समय
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-तीन साल के भीतर प्रतिक्रिया समय में आई कमी
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। पर्वतीय क्षेत्रों में आपातकालीन सेवा में 108 एंबुलेंस लाइफ लाइन बनी है। पिछले तीन साल में कॉल आने पर प्रतिक्रिया समय में कमी आई है। अब पर्वतीय क्षेत्रों में कॉल आने पर 23.09 मिनट में एंबुलेंस पहुंच रही है।
प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों की विकट भौगोलिक परिस्थिति होने से समय पर एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती है। सीमित सड़क नेटवर्क और मौसम की प्रतिकूलता के बावजूद 108 सेवा में लगातार सुधार हुआ है। प्रदेश सरकार के लिए नागरिकों का जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में राज्य की 108 आपातकालीन सेवा ने बीते पांच वर्षों में आपात स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक सशक्त, भरोसेमंद और प्रभावी प्रणाली के रूप में पहचान स्थापित की है।
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108 आपातकालीन सेवा राज्य के प्रत्येक नागरिक के लिए आपदा और संकट की घड़ी में जीवनरेखा के समान है। सड़क दुर्घटनाएं, हृदयाघात, प्रसव संबंधी आपात स्थिति, गंभीर बीमारी, प्राकृतिक आपदा व भीड़भाड़ वाले धार्मिक व राष्ट्रीय आयोजन हर परिस्थिति में यह सेवा 24 घंटे सक्रिय है। वर्ष 2020-21 में 108 सेवा के तहत कुल 1,06,768 आपात मामले दर्ज किए गए। वर्ष 2021-22 में आपात मामलों की संख्या में लगभग 48 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा 1,58,070 तक पहुंच गया। वर्ष 2022-23 में 1,62,301 आपात मामलों के साथ पांच वर्षों का सर्वाधिक आंकड़ा दर्ज किया गया। वर्ष 2023-24 में आपात मामलों की संख्या घटकर 1,51,276 व 2024-25 में 1,38,369 रह गई।
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मैदानी क्षेत्रों में 108 एंबुलेंस का रिस्पांस टाइम 12.48 मिनट
पर्वतीय क्षेत्रों की तुलना में मैदानी क्षेत्रों में 108 एंबुलेंस का रिस्पांस टाइम 12.48 मिनट है। शहरी क्षेत्रों में बेहतर सड़क नेटवर्क, तकनीकी संसाधनों और कुशल कॉल प्रबंधन प्रणाली से 108 सेवा की प्रतिक्रिया समय में कमी आ रही है।
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राज्य में 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ है। भविष्य में हमारा फोकस ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में प्रतिक्रिया समय को और बेहतर करने, तकनीकी संसाधनों को अपग्रेड करने तथा मानव संसाधन क्षमता को सशक्त बनाने पर रहेगा। नई एंबुलेंस, अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, डिजिटल एकीकरण व सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाएगी। -डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव स्वास्थ्य
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