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पहले दिन स्वास्थ्य सेवाओं ने दिया दर्द

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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नए साल के पहले दिन सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं पुराने ढर्रे पर चली। जिला अस्पताल में सर्जन, बाल रोग, हड्डी रोग की ओपीडी ठप रही तो एक्स-रे की मशीन खराब हो गई। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड भी नहीं हुए। इससे मरीजों को साल के पहले दिन निराश होकर लौटना पड़ा।
सरकारी इलाज की सुविधाओं में दस प्रतिशत की वृद्घि एक जनवरी से कर दी है। पर्चा 21 के बजाय 23 रुपये का मिला। पर्चा बनवाकर मरीज ओपीडी में दिखाने को पहुंचे तो बाल रोग, सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ की ओपीडी पर ताला लटका मिला। अस्पताल में दो सर्जन होने के चलते हुए भी ओपीडी बंद होने से मरीजों को बड़ी परेशानी उठानी पड़ी। सर्द मौसम में बच्चों को निमोनिया, खांसी, जुकाम, बुखार, सांस आदि की बीमारी होने पर दिखाने पहुंचे परिजनों को बच्चों को बिना ओपीडी में दिखाए ही लौटना पड़ा। हड्डी रोग विशेषज्ञ पिछले एक महीने से न होने पर अन्य डॉक्टर की व्यवस्था न किए जाने से ओपीडी मंगलवार को भी ठप रही। सबसे बड़ी लापरवाही की बात तो यही कि डॉक्टर न होने की सूचना पर्चा काउंटर के साथ ओपीडी के बाहर चस्पा तक नहीं की।
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एंटी रैबीज वैक्सीन भी समाप्त
जिला अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं है। जिसकी सूचना बाकायदा इंजेक्शन कक्ष के बाहर चस्पा कर दी गई है। जबकि जिलाधिकारी दीपक रावत के निर्देशों के अनुसार एंटी रैबीज वैक्सीन कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उनसे बजट लेकर नकद वैक्सीन खरीदने को आदेश दिए थे। मंगलवार को कई लोगों को बिना वैक्सीन लगाए ही लौटना पड़ा।
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