घनसाली (टिहरी)। उत्तराखंड की लुप्त हो रही ढोल सागर विद्या को जीवित रखने के लिए सुरीरा परिवार की पहल पर रविवार को चमियाला में ढोल दमाऊं प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में 18 टीमों ने प्रतिभाग किया। विजेता टीमों को नकद धनराशि और ट्राफी देकर सम्मनित किया गया। ढोल दमाऊं की थाप पर चमियाला दिनभर गुंजयमान रहा।
सुरीरा परिवार की ओर से पिछले चार वर्षों से ढोल दमाऊं प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। रविवार को चमियाला में प्रतियोगिता आयोजित करने पर सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दूरभाष पर कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए ऐसे आयोजनों की जरूरत है। मुख्य अतिथि कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि ढोल जिंदा रहेगा, तो देवी देवता और संस्कृति जीवित रह सकती है। ढोल और दमाऊं के अलावा विश्व में ऐसा कोई वाद्य यंत्र नही है, जिससे देवी देवता अवतरित हो सके। प्रतियोगिता में पौड़ीखाल के शिवचरण दास व भगवान दास प्रथम, अखोडी ग्यारहगांव के भरपुर दास व शेरदास द्वितीय और रुद्रप्रयाग के मनोज कुमार और महेंद्र कुमार तृतीय रहे। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली टीम को 15 हजार, द्वितीय को 7500 और तृतीय को 3500 रुपये का नकद व अन्य सभी टीमों को 1500 रुपये सांत्वना पुरस्कार व ट्राफी देकर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर चमियाला नगर पंचायत अध्यक्ष ममता पंवार, घनसाली के शंकरपाल सजवाण, ब्लॉक प्रमुख विजय गुनसोला, नरेंद्र डंगवाल, लक्ष्मी प्रसाद जोशी, धनीलाल शाह, पंकज रतूड़ी, आयोजक पीडी सुरीरा, सुशील सुरीरा, गिरीश बडोनी आदि उपस्थित रहे।