ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राज्य महिला आयोग में अध्यक्ष के अभाव में 600 शिकायतें लंबित पड़ी हुई हैं। हालत यह है कि प्रदेश सरकार आयोग के लिए चार महीने से अध्यक्ष और डेढ़ साल से उपाध्यक्ष नियुक्त नहीं कर पाई है। इसी का नतीजा है कि चार माह से लोक अदालत तक नहीं लग पाई है।
ग्रामीण क्षेत्र और ब्लॉक मुख्यालयों में महिलाओं को उनके लिए बनाए गए कानूनों के प्रति जागरूक करने के लिए लोक अदालतें लगाई जाती थी। पूर्व अध्यक्ष के नेतृत्व में लगभग 80 लोक अदालतें लगाई गईं। इसमें महिलाओं की काफी भीड़ जुटी, लेकिन मई-2018 में अध्यक्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद से एक भी लोक अदालत नहीं लगी। उसके बाद से अब तक 600 शिकायतें लंबित पड़ी हुई हैं।
मुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला डाल दिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की नियुक्ति जल्द की जाएगी। लंबित मामलों को जल्द निपटाया जाएगा।
रेखा आर्य, महिला विकास एवं बाल कल्याण राज्य मंत्री
इन मामलों का होता है निस्तारण
महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा, बलात्कार, कार्यस्थल में महिलाओं का शोषण, बाल विवाह समेत किसी भी प्रकार का उत्पीड़न होने की सुनवाई के लिए आयोग कार्यालय में शिकायती पत्र दो प्रतियों में प्राप्त किए जाते हैं। पत्र के साथ किसी प्रकार की कोर्ट फीस या स्टांप पेपर की आवश्यकता नहीं होती। शिकायतों की सुनवाई आयोग में केवल संबंधित पक्षों से ही की जाती है। इसमें किसी प्रतिनिधि या अधिवक्ता की उपस्थिति मान्य नहीं होती। पीड़ित महिला कभी भी राज्य महिला आयोग से सीधे संपर्क कर सकतीं हैं। समस्या का निस्तारण कराने के लिए आयोग हरसंभव प्रयास करता है।