ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
विधि दाखिलों की प्रवेश परीक्षा क्लैट में इस साल नया इंटरफेस और मुश्किल लॉजिकल रीजनिंग अभ्यर्थियों के लिए मुसीबत बन गया। एक ओर नए इंटरफेस में कई नए बदलावों को समझने में परेशानी हुई तो दूसरी ओर लॉजिकल रीजनिंग के सवाल सबसे मुश्किल साबित हुए। विशेषज्ञों का तर्क है कि इस बार क्लैट की कटऑफ 120 से 125 अंकों के आसपास रह सकती है। इतने अंकों पर शीर्ष के राष्ट्रीय विधि संस्थानों में दाखिला मिल सकता है।
रविवार को हुई क्लैट में सबसे सरप्राइज फैक्टर इंटरफेस का रहा। इस परीक्षा में कई नए टैब बनाए गए थे। मार्क्ड फॉर रिव्यू का बटन हटाकर टैग और डिटैग का विकल्प बना दिया गया। इस वजह से मॉक टेस्ट से ऑनलाइन परीक्षा की तैयारी करने वालों को परेशानी हुई। प्रश्न पत्र के टेस्क्ट का साइज भी बदला गया था। पेपर में लीगल एप्टीट्यूड के सवाल तो आसान रहे लेकिन लॉजिकल रीजनिंग मुश्किल रही। अन्य सेक्शन सरल थे। अंग्रेजी के सेक्शन में एक कॉम्प्रिहेंशन था। इसके अलावा व्याकरण, क्लोज टेस्ट व क्रिटिकल रीजनिंग पर प्रश्न थे। सामान्य ज्ञान में सर्वाधिक सवाल करेंट अफेयर्स से जुड़े थे। स्टेटिक जीके के भी सवाल आए, यह भी करेंट अफेयर्स से संबंधित थे। लीगल एप्टीट्यूट के सेक्शन में 40 प्रश्न लीगल रीजनिंग के सिद्धांत पर आधारित थे। दस संविधान पर आधारित लीगल नॉलेज के प्रश्न पूछे गए। लॉजिकल रीजनिंग में तीन प्रश्न थे, जिनमें एक अत्यंत कठिन था। क्रिटिकल रीजनिंग पर भी प्रश्न आए। गणित के प्रश्नों ने अभ्यर्थियों का सबसे ज्यादा वक्त लिया। यह सेक्शन ज्यादा मुश्किल नहीं पर लंबा जरूर था। इनमें प्रतिशत, लाभ-हानि, बीजगणित, ज्यामिति आदि के सवाल शामिल रहे। पेपर देने के बाद ज्यादातर अभ्यर्थियों ने लॉजिकल रीजनिंग के सवालों को ही मुश्किल करार दिया।
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क्लैट की कटऑफ में इस साल पांच से सात अंकों की बढ़ोतरी हो सकती है। वैसे यह कहा जा सकता है कि 120 या इससे ऊपर के अंकों पर देश के शीर्ष राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में दाखिले की राह खुल जाएगी। -राजीव कुकरेजा, निदेशक, टाइम इंस्टीट्यूट
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क्लैट के 11वें संस्करण में लॉजिकल रीजनिंग की मुश्किल और नए इंटरफेस की वजह से कटऑफ में परिवर्तन आएगा। इस परीक्षा से 2342 लॉ की सीटों पर दाखिले का मौका मिलता है। इस साल एनएलएस बंगलुरु में 140 अंकों के आसपास सीट मिल सकती है।
-एसएन उपाध्याय, निदेशक, लॉ प्रेप दून