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गजराजों की मौत पर कार्रवाई ‘गज भर’ नहीं कार्रवाई के दावे मतलब रस्म

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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राजाजी टाइगर रिजर्व में हाथियों की ट्रेन की टक्कर से मौत पर वन विभाग की ओर से भले ही कार्रवाई के तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन अब तक एक भी मामले में ‘गज भर’ भी कार्रवाई नहीं हुई। शायद यही वजह है कि ट्रेन की टक्कर से हाथियों की मौत का सिलसिला जारी है।
17 फरवरी 2018 को राजाजी टाइगर रिजर्व की कांसरो रेंज में ट्रेन की टक्कर से चार वर्षीय नर हाथी की मौत हो गई थी। वन विभाग ने ट्रेन चालक के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया गया, लेकिन एक माह बाद भी प्रकरण में आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रकरण की जांच भी केवल रस्म अदायगी साबित हुई। जबकि, इससे पहले वर्ष 2013 में दो हाथियों की रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की टक्कर से मौत हो गई थी। मामले में वन विभाग की ओर से मोतीचूर रेंज में 13 जनवरी 2013 को रेल चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया, लेकिन इसमें भी चालक के खिलाफ इससे आगे की कार्रवाई नहीं हुई।
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वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले में कार्रवाई के लिए महाधिवक्ता उत्तराखंड से सुझाव लिया गया था, लेकिन तत्कालीन महाधिवक्ता की ओर से कहा गया कि हादसा रेलवे की लापरवाही से हुआ है। रेलवे चाहे तो मामले में विभागीय कार्रवाई करे, लेकिन इसके बाद से इस प्रकरण में कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब एक अन्य हाथी की मौत पर वन विभाग की ओर से मामले में कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कही ऐसा न हो यह प्रकरण भी केवल रस्म अदायगी भर साबित हो।
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अधिकतर मामले में रिपोर्ट तक नहीं होती
राजाजी टाइगर रिजर्व में अब तक 27 हाथियों की ट्रेन की टक्कर से मौत हो चुकी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर मामले में रिपोर्ट तक दर्ज नहीं होती। रेलवे और वन विभाग की ओर से मामले को बाहर ही निपटा लिया जाता है।
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हाथी की मौत रेलवे चालक की लापरवाही से हुई है। ट्रेन की गति तेज थी, संबंधित चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इस प्रकरण में रेलवे के डीआरएम से भी बात की जाएगी।
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-डीवीएस खाती, प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव
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धरे रह जाते हैं सुरक्षा के दावे
देहरादून। राजाजी टाइगर रिजर्व में रेलवे ट्रैक से हाथी और अन्य वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर रेलवे और वन विभाग की ओर से तमाम दावे किए जाते, लेकिन हाथी की मौत के बाद सभी दावे धरे रह जाते हैं। कई बार वन और रेलवे की ओर से बैठक कर हाथी प्रभावित क्षेत्रों में ट्रेन को धीमी गति से चलाने, हार्न बजाने, रेलवे का कचरा जंगल में न डालने सहित कई दावे किए गए। साथ ही वन विभाग की ओर से विभिन्न दस स्थानों पर रेलवे ट्रैक समतल करने, छह स्थानों पर वाच टावर लगाने, रेलवे ट्रैक के आसपास की झाड़ियां काटने, नेटवर्क कनेक्टिविटी समेत कुछ बाइकर्स की तैनाती आदि के दावे किए गए, लेकिन अब तक इस दिशा में कुछ नहीं किया जा सका है। वहीं, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि राजाजी टाइगर रिजर्व में रेलवे ट्रैक पर वन्य जीवों की सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए केंद्र सरकार ने ढाई करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। लेकिन धनराशि जारी नहीं होने से दिक्कतें पेश आ रही हैं।
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